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ग्रेटर नोएडा हादसा Photograph: (X)
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 इलाके में शुक्रवार देर रात हुए दर्दनाक हादसे ने शहरी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में भरे पानी में गिर गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई.
आखिर कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के अनुसार, हादसे के समय इलाके में घना कोहरा छाया हुआ था और विजिबिलिटी बेहद कम थी. इसी कारण सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता को सड़क और नाले की सही पहचान नहीं हो सकी. उनकी कार नाले की बाउंड्री तोड़ते हुए सीधे मॉल के बेसमेंट में जा गिरी, जहां पहले से ही काफी गहरा पानी भरा हुआ था.
कार से बाहर निकलने की कोशिश नाकाम
कार के पानी में गिरते ही युवराज मेहता ने बाहर निकलने का प्रयास किया, लेकिन पानी के तेज दबाव के कारण वे कार का दरवाजा नहीं खोल सके. इसी बीच उन्होंने अपने पिता राज कुमार मेहता को फोन कर बताया कि वे गहरे गड्ढे में गिर गए हैं और पानी में डूब रहे हैं. बेटे की घबराई आवाज सुनकर पिता ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी.
पिता के सामने ही बुझ गई बेटे की सांसें
सूचना मिलने के बाद राज कुमार मेहता खुद घटनास्थल पर पहुंचे. कुछ ही देर में पुलिस और दमकल विभाग की टीमें भी मौके पर पहुंचीं. उस समय युवराज कार के अंदर बचाओ-बचाओ चिल्ला रहे थे और मोबाइल टॉर्च जलाकर इशारा कर रहे थे. लेकिन घना कोहरा, अंधेरा और गहरे पानी के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी हुई और युवराज को समय रहते बाहर नहीं निकाला जा सका.
कितने बजे की घटना है?
बताया जा रहा है कि रात करीब पौने दो बजे युवराज मेहता कार समेत पानी में डूब गए. पिता के सामने बेटे की तड़पकर हुई मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया. राज कुमार मेहता ने इस हादसे के लिए प्रशासन और संबंधित बिल्डर की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है.
बिल्डर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
पुलिस ने पिता की शिकायत के आधार पर बिल्डर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है. आरोप है कि निर्माणाधीन मॉल और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था.
हजारों लोगों की जान पर खतरा
हादसे वाली जगह के आसपास 50 से अधिक सोसाइटी हैं, जिनमें से 20 से ज्यादा सोसाइटी में हजारों लोग रहते हैं. स्थानीय निवासियों का कहना है कि खुले नाले, अधूरी बाउंड्री और जलभराव की समस्या लंबे समय से बनी हुई है. हादसे के बाद प्रशासन ने आनन-फानन में करीब 70 फीट गहरे खाली प्लॉट में मलबा और कूड़ा डालकर उसे भरवा दिया, लेकिन लोगों का सवाल है कि क्या इससे भविष्य में ऐसे हादसे रुक पाएंगे.
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