Noida Engineer Death: नोएडा इंजीनियर की मौत मामले में बड़ा एक्शन, पुलिस ने बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार किया

Noida Engineer Death: नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत मामले में न्यूज नेशन की खबर का बड़ा असर हुआ है. पुलिस ने इस मामले में बिल्डर अभयर कुमार को गिरफ्तार किया है.

Noida Engineer Death: नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत मामले में न्यूज नेशन की खबर का बड़ा असर हुआ है. पुलिस ने इस मामले में बिल्डर अभयर कुमार को गिरफ्तार किया है.

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Dheeraj Sharma
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Nodia Engineer death builder Arrest

Noida Engineer Death: नोएडा में इंजीनियर की मौत मामले में एक और एक्शन हुआ है. यहां पुलिस ने एक बिल्डर को गिरफ्तार किया है, जिसका नाम अभय सिंह और वह एमजेड विश्टाउन का मालिक है. ये कार्रवाई नॉलेज पार्क थाने की पुलिस ने की है.  बता दें कि ग्रेटर नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में पुलिस कार्रवाई तेज हो गई है. इस केस में नामजद बिल्डर अभय कुमार को नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान घटनास्थल से जुड़े निर्माण कार्य और सुरक्षा इंतजामों में गंभीर खामियां सामने आई हैं, जिनमें बिल्डर की भूमिका स्पष्ट होती जा रही है.

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दो बिल्डरों को किया था नामजद

इंजीनियर मौत मामले में दो बिल्डरों को नामजद किया गया था. दरअसल घटना के बाद ये सामने आया है कि पहली नजर में गलती बिल्डरों की दिखाई दे रही है. ऐसे में पुलिस अधिकारियों ने एफआईआर में दो बिल्डरों के नाम लिखे. जांच में ये सामने आया कि युवराज की मौत में लापरवाही बड़ी वजह थी. अभय कुमार की गिरफ्तारी तो शुरुआत है माना जा रहा है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी और भी नाम सामने आएंगे और अन्य गिरफ्तारियां भी संभव हैं.

क्या बोली SIT?

एडीजी मेरठ जोन और एसआईटी टीम के हेड भानु भास्कर, ने बताया कि अभी जांच शुरू हुई है. सब लोगों को बात करने के बाद 5 दिन में हम अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे. फिलहाल जांच जारी है इसलिए सबकुछ अभी नहीं कहा जा सकता है.   

युवराज की कार की तलाश

उधर..सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता के मौत केस में मंगलवार को NDRF की टीम मौके पर पहुंची.  टीम यहां युवराज की कार तलाशने में जुटी है. इस अभियान में कुल 3 एनडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं. इनमें तीन गोताखोर भी शामिल हैं. ये गोताखोर 70 फीट गहरे बेसमेंट के अंदर जाकर गाड़ी की तलाश कर रहे हैं. 

कैसे हुआ हादसा?

युवराज मेहता गुरुग्राम से काम खत्म कर घर लौट रहे थे, तभी उनकी कार निर्माणाधीन परिसर के बेसमेंट में गिर गई, जहां भारी मात्रा में पानी भरा हुआ था. घने कोहरे और पर्याप्त संकेतक न होने के कारण उन्हें खतरे का अंदाजा नहीं हो पाया। कार गिरने के बाद युवराज ने बाहर निकलने की कोशिश की और अपने पिता को फोन कर मदद भी मांगी, लेकिन समय पर बचाव नहीं हो सका.

रेस्क्यू में देरी पर सवाल

इस पूरे मामले में रेस्क्यू ऑपरेशन की देरी सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरी है. सूचना मिलने के बावजूद पुलिस और दमकल विभाग के पहुंचने में काफी समय लग गया. मौके पर न तो पर्याप्त उपकरण थे और न ही पानी निकालने की तत्काल व्यवस्था। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रेस्क्यू समय पर होता, तो युवराज की जान बच सकती थी.

एसआईटी जांच और आगे की कार्रवाई

प्राधिकरण की उच्चस्तरीय बैठक के बाद इस मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी गई है. एसआईटी ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए प्राधिकरण अधिकारियों, ठेकेदारों और संबंधित विभागों की भूमिका की भी समीक्षा शुरू कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में कुछ और अधिकारियों पर कार्रवाई संभव है.

प्रशासनिक लापरवाही पर उबाल

युवराज की मौत ने ग्रेटर नोएडा में निर्माणाधीन परियोजनाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों और मृतक के परिवार ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है. यह मामला अब केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की जिम्मेदारी तय करने की परीक्षा बन चुका है.

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