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राजनाथ सिंह ने दी चीन को चेतावनी, कहा- हम शांति चाहते हैं लेकिन...

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि चीन के साथ सीमा गतिरोध से भारत जिस तरह से निपटा है, उसने साबित किया है कि भारत कमजोर नहीं है और सीमा पर उल्लंघन, आक्रामकता तथा किसी भी तरह की एकतरफा कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दे सकता है.

Bhasha | Updated on: 19 Dec 2020, 11:22:54 PM
rajnath singh

राजनाथ सिंह (Photo Credit: फाइल फोटो)

हैदराबाद:

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि चीन के साथ सीमा गतिरोध से भारत जिस तरह से निपटा है, उसने साबित किया है कि भारत कमजोर नहीं है और सीमा पर उल्लंघन, आक्रामकता तथा किसी भी तरह की एकतरफा कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दे सकता है. इस गतिरोध को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है.

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत विवादों के शांतिपूर्ण समाधान में विश्वास रखता है लेकिन देश के आत्मसम्मान पर किसी भी तरह की चोट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सात महीने से अधिक समय से गतिरोध बना हुआ है. हैदराबाद के बाहरी क्षेत्र डिंडीगुल में वायु सेना अकादमी में संयुक्त स्नातक परेड को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान ‘‘चीन के रवैये ने उसके इरादों को जाहिर कर दिया.’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हमने साबित किया है कि भारत कमजोर नहीं है. यह नया भारत है जो सीमा पर उल्लंघन, आक्रामकता तथा किसी भी तरह की एकतरफा कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दे सकता है.’’

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सिंह ने कहा कि भारत को कई देशों का समर्थन मिला है और उसकी सराहना भी हुई है. गतिरोध का हल निकालने के लिए कूटनीतिक एवं सैन्य स्तर पर हुई कई दौर की वार्ता का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘मैं दोहराना चाहता हूं कि हम संघर्ष नहीं, शांति चाहते हैं, लेकिन देश के आत्मसम्मान पर किसी भी तरह की चोट को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे.’’

उन्होंने कहा कि देश किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है. सिंह ने पश्चिमी सेक्टर का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान सीमाओं पर छिटपुट संघर्षों को अंजाम दे रहा है. उन्होंने कहा कि चार युद्धों में भारत से पराजित होने के बावजूद पड़ोसी देश आतंकवाद के जरिए ‘‘छद्म युद्ध’’ छेड़ रहा है, लेकिन सैन्य बल और पुलिस आतंकवाद से प्रभावी ढंग से निपट रहे हैं.

पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकवादियों के शिविरों पर भारत के हवाई हमलों का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत न केवल देश के भीतर आतंकवाद से प्रभावी ढंग से मुकाबला कर रहा है बल्कि सीमाओं के बाहर जाकर भी कार्रवाई कर रहा है. उन्होंने कहा कि यह दुनिया को भारत की सैन्य ताकत और आतंकवाद के खिलाफ भारत के मजबूत इरादों को दर्शाता है. मौजूदा समय के अनुसार युद्ध की रणनीतियों को बदलने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, सिंह ने कहा कि देश को न केवल सीमाओं और समुद्रों, बल्कि अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिसके लिए उसे तैयार रहने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए आपको खुद को लगातार अपडेट रखने की आवश्यकता है.’’

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उन्होंने कहा, ‘‘भविष्य के युद्ध और बेहतरी के लिए यह आवश्यक है कि एक सैनिक के अलावा आपके अंदर एक विद्वान भी होना चाहिए.’’ रक्षा मंत्री ने नये सैन्य अधिकारियों को खुद को सैन्य रणनीति और तकनीक के बारे में नयी जानकारी रखने के लिए कहा. उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भी ध्यान केन्द्रित करने को कहा. रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने हाल ही में सशस्त्र बलों में स्वदेशीकरण को सशक्त बनाने और बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं.

उन्होंने कहा कि एक तरफ हल्के लड़ाकू विमान (एसीए) तेजस को शामिल किया गया जबकि दूसरी ओर पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान राफेल को भी शामिल किया गया है. सिंह ने कहा कि सुधारों के रूप में रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को बढ़ाने, रक्षा विनिर्माण पर नई नीति और आयुध कारखानों के निगमीकरण समेत कई कदम उठाये गये हैं.

इससे पूर्व रक्षा मंत्री ने परेड के मुख्य अतिथि के रूप में 114 स्नातक फ्लाइट कैडेट्स को ‘‘प्रेसिडेंट्स कमीशन’’ प्रदान किया. एक रक्षा विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारतीय नौसेना के छह अधिकारियों, भारतीय तटरक्षक बल के पांच और मित्रवत विदेशी देशों से तीन (वियतनाम से दो और नाइजीरिया से एक) को भी ‘विंग्स’ से सम्मानित किया गया. 

First Published : 19 Dec 2020, 11:22:54 PM

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