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SC में राष्ट्रीय महत्व के मामलों में बहस का Youtube पर Live Streaming

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव रोहित पांडे ने कहा कि देश हित के महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई के बारे में आम लोगों को अगले दिन या फिर टीवी चैनलों के माध्यम से ही पता चल पाता था. उसमें भी लोगों को आधी-अधूरी ही जानकारी मिल पाती थी. लेकिन...

Updated on: 23 Sep 2022, 04:36 PM

highlights

  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
  • संवैधानिक बेंच की सुनवाई का सजीव प्रसारण
  • यूट्यूब के माध्यम से होगी लाइव स्ट्रीमिंग

नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट में अगले सप्ताह से संवैधानिक बेंच में चलने वाले मामलों का सीधा प्रसारण यू ट्यूब के जरिए होगा. ये फैसला चीफ जस्टिस यूयू ललित की अगुवाई में एक बैठक के बाद किया गया. सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने इस बारे में चीफ जस्टिस समेत सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को लिख कर जनहित व संवैधानिक महत्व वाले मामलों की सुनवाई के सीधे प्रसारण की बात कही थी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संवैधानिक बेंच में EWS, हिजाब मामला, नागरिकता संशोधन विधेयक जैसे देश हित के मामलों की सुनवाई का सीधा प्रसारण होगा.

खतरे भी हैं लाइव प्रसारण के साथ

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव रोहित पांडे ने इस मुद्दे पर न्यूज नेशन से खास बातचीत की. उन्होंने कहा कि लाइव स्ट्रीमिंग के तमाम फायदों के साथ कुछ नुकसान भी है. खास कर सोशल मीडिया पर मॉर्फ वीडियो का खतरा रहता है. रोहित पांडे ने कहा कि यूट्यूब पर सुप्रीम कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग से उसमें छेड़छाड़ का डर रहेगा, लेकिन इसे लेकर उचित सजगता बरती जाएगी. उन्होंने कहा कि लाइव स्ट्रीमिंग से जनता को सारी कार्रवाई लाइव दिखती रहेगी. फिर उसे किसी खास मीडिया रिपोर्टिंग के भरोसे नहीं बैठना पड़ेगा. वो सारी कार्रवाई देख सकती है, बहसों को सुन सकती है. ये कदम हमारी न्यायिक व्यवस्था में मील का पत्थर साबित होगा.

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राष्ट्रीय महत्व के मामलों का सीधा प्रसारण

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव रोहित पांडे ने कहा कि देश हित के महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई के बारे में आम लोगों को अगले दिन या फिर टीवी चैनलों के माध्यम से ही पता चल पाता था. उसमें भी लोगों को आधी-अधूरी ही जानकारी मिल पाती थी. लेकिन अब लोग ये देख सकेंगे और जान सकेंगे कि किस पक्ष ने क्या बात कही. खास कर ईडब्ल्यूएस मामला, हिजाब मामला, सीएए जैसे राष्ट्रीय महत्व के मामलों में होने वाली बहस को अब पूरी दुनिया देख सकेगी.