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रोहिंग्याओं पर SC का फैसला, प्रक्रिया के पालन के बिना वापस नहीं भेजे जाएंगे

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रोहिंग्या मुसलमानों की वापसी पर फिलहाल बिना, प्रक्रिया के पालने के बिना वापस नहीं भेजे जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल अभी इन रोहिंग्याओं की रिहाई नहीं होगी.

Written By : अरविंद सिंह | Edited By : Ravindra Singh | Updated on: 08 Apr 2021, 04:21:39 PM
Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट (Photo Credit: फाइल)

highlights

  • रोहिंग्या मुसलमानों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
  • बिना पूरी प्रक्रिया के बाहर नहीं जाएंगे रोहिंग्या
  • प्रक्रिया पूरी होने तक होल्डिंग सेंटर में रहेंगे रोहिंग्या

नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) जम्मू में हिरासत में लिए गए 168 रोहिंग्या शरणार्थियों (Rohingya Refugees) को म्यांमार वापस भेजने पर फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि, रोहिंग्याओं को नियत प्रक्रिया का पालन किए बिना म्यांमार नहीं भेजा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रोहिंग्या मुसलमानों की वापसी पर फिलहाल बिना, प्रक्रिया के पालने के बिना वापस नहीं भेजे जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल अभी इन रोहिंग्याओं की रिहाई नहीं होगी. इन  सभी को अभी प्रक्रिया पूरी होने तक होल्डिंग सेंटर में रहना होगा.

आपको बता दें कि कुछ रोहिंग्याओं को लेकर वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इस बात की मांग की थी कि इन लोगों को रिहा कर भारत में ही स्वतंत्र रूप से रहने दिया जाए. प्रशांत भूषण की इस याचिका पर केंद्र सरकार ने इसका कड़ा विरोध किया था. वहीं प्रशांत भूषण की इस मांग का विरोध करते हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलीलें रखीं.

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भारत सरकार की म्यामार सरकार से बातचीत जारी
तुषार मेहता ने कहा कि जिस अंतर्राष्ट्रीय समझौते के आधार पर यह फैसला आया, उस पर भारत ने कोई हस्ताक्षर नहीं किए हैं. भारत सरकार ने अपने राष्ट्रीय हितों और राष्ट्री संप्रभुता के लिए कई इंटरनेशनल समझौतों से दूरी बना रखी है. सॉलिसीटर जनलर तुषार मेहता ने आगे बताया कि रोहिंग्याओं को लेकर भारत सरकार की म्यांमार सरकार से बातचीत जारी है. म्यांमार सरकार की ओर से अभी इस मामले पर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया है. म्यांमार के किसी आधिकारिक फैसले के बाद ही इन लोगों को वापस भेजा जाएगा. 

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आर्टिकल 21 के हवाले के मुताबिक हिरासत में नहीं रखा जाएगा
प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से आर्टिकल 21 का हवाला देते हुए इस बात की मांग की थी कि रोहिंग्याओं को हिरासत में नहीं रखा जाएगा. प्रशांत भूषण ने कहा मैं यह निर्देश जारी करने का अनुरोध कर रहा हूं कि इन रोहिंग्याओं को संविधान के अर्टिकल 21 के तहत हिरासत में नहीं रखा जाए और म्यांमार निर्वासित नहीं किया जाए. मेहता ने कहा कि वे बिल्कुल भी शरणार्थी नहीं हैं और यह दूसरे दौर का वाद है क्योंकि इस अदालत ने याचिकाकर्ता, जो खुद एक रोहिंग्या है, द्वारा दाखिल एक आवेदन को पहले खारिज कर दिया था.

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First Published : 08 Apr 2021, 03:11:54 PM

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