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टीकों की खरीद को रखे 35 हजार करोड़ का ब्यौरा दे केंद्र, SC सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब सरकार की नीतियों के जरिये नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा हो तो हमारा संविधान, अदालत तो मूक दर्शक बनने रहने की इजाजत नहीं देता.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 03 Jun 2021, 07:01:52 AM
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टीकाकरण में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के टीकाकरण रवैये को माना अव्यावहारिक
  • ग्रामीण आबादी को लेकर खड़ा किया केंद्र सरकार को कठघरे में
  • साल के अंत तक टीकाकरण पर मांगा सरकार से रोडमैप

नई दिल्ली:

कोरोना वायरस (Corona Virus) रोधी टीकाकरण में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को लगभग कठघरे में खड़ा करते हुए कई बातों का जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत में ज्यादातर लोगों के पास इंटरनेट तक पहुंच नहीं है. देश में 50 फीसदी से कम आवादी के पास वायरलेस डाटा सर्विस है. ऐसे में ये व्यावहारिक नहीं है कि देश की ज्यादातर जनसंख्या वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराएं. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र से कहा है कि 18 से 45 वर्ष के लोगों के लिए कोविड-19 टीकाकरण नीति से जुड़ी अपनी सोच को दर्शाने वाले सभी प्रासंगिक दस्तावेज और फाइलों की नोटिंग रिकॉर्ड पर रखे तथा कोवैक्सीन, कोविशील्ड एवं स्पूतनिक वी समेत सभी टीकों की आज तक की खरीद का ब्योरा पेश करे. 

सुप्रीम कोर्ट के रहे तल्ख तेवर
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब सरकार की नीतियों के जरिये नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा हो तो हमारा संविधान, अदालत तो मूक दर्शक बनने रहने की इजाजत नहीं देता. इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार की पेड वैक्सीन नीति को प्रथमदृष्टया मनमाना और अतार्किक बताते हुए स्‍पष्‍ट करने का निर्देश दिया कि केंद्रीय बजट में वैक्‍सीन की खरीद के लिए रखे गए 35,000 करोड़ रुपये अब तक कैसे खर्च किए गए हैं. साथ ही पूछा कि इस फंड का इस्‍तेमाल 18-44 वर्ष के लोगों के लिए वैक्‍सीन खरीदने के लिए क्यों नहीं किया जा सकता.

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साल के अंत तक टीकाकरण का रोडमैप दे केंद्र
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, एलएन राव और श्रीपति रवींद्र भट्ट की विशेष पीठ ने न्यायालय की वेबसाइट पर डाले गए 31 मई के आदेश में पीठ ने कहा, हम केंद्र सरकार को दो सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हैं. पीठ ने केंद्र से यह सुनिश्चित करने को कहा कि आदेश में प्रत्येक मुद्दे पर अलग-अलग जवाब दिया जाए. पीठ ने कहा, कोविड-19 के सभी टीकों (कोवैक्सीन, कोविशील्ड तथा स्पुतनिक वी) की खरीद पर आज तक के केंद्र सरकार के ब्योरे के संबंध में संपूर्ण आंकड़े. आंकड़ों में स्पष्ट होना चाहिए: (क) केंद्र सरकार द्वारा तीनों टीकों की खरीद के लिए दिए गए सभी ऑर्डर की तारीखें, (ख) हर तारीख पर कितनी मात्रा में टीकों का ऑर्डर दिया गया, उसका ब्योरा और (ग) आपूर्ति की प्रस्तावित तारीख. कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार मौजूदा वैक्सीन नीति की समीक्षा करे और उसे भी कोर्ट को बताएं. इसके साथ ही 31 दिसंबर तक वैक्‍सीन की संभावित उपलब्‍धता का रोडमैप भी उसके समक्ष पेश करने को कहा है.

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अगली सुनवाई 30 जून को
शीर्ष अदालत ने 31 मई को ग्रामीण और शहरी भारत के बीच डिजिटल विभाजन को रेखांकित करते हुए कोविड टीकों के लिए कोविन प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य पंजीकरण को लेकर केंद्र से सवाल पूछे थे. शीर्ष अदालत ने कोविड-19 के प्रबंधन पर स्वत: संज्ञान लिए एक मामले में यह आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की वैक्सीन नीति को चुनौती दी गई है, वैक्सीनेशन को बेहद जरूरी बताते हुए कोर्ट ने कहा, ऐसी खबरें हैं कि 18-44 वर्ष आयु वर्ग के लोग न केवल कोविड-19 से संक्रमित हो रहे हैं, बल्कि गंभीर रूप से बीमार भी हो रहे हैं. उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती होना पड़ रहा है. तमाम दुर्भाग्यपूर्ण मामलों में मरीजों की मौतें भी हुई हैं. मामले की सुनवाई 30 जून को होगी.

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First Published : 03 Jun 2021, 07:00:03 AM

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