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अब राष्ट्रीय मिलिट्री कॉलेज व स्कूलों में भी लड़कियों को प्रवेश

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि लड़कियों को अब राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कॉलेज समेत देश के पांच राष्ट्रीय सैन्य स्कूलों में भी दाखिला मिल सकेगा.

Written By : कुलदीप सिंह | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 07 Oct 2021, 01:34:14 PM
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अब लड़कियां भी दाखिला पा सकेंगी मिलिट्री कॉलेज में. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया
  • अगले सत्र से सैन्य स्कूलों में लड़कियों को भी प्रवेश
  • हर छह माह में 5 लड़कियां पहुंचेंगी मिलिट्री स्कूल

नई दिल्ली:

नेशनल डिफेंस एकेडमी की तर्ज पर अब आरआईएमसी और आरएमएस में भी लड़कियों को प्रवेश मिलेगा. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि लड़कियों को अब राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कॉलेज समेत देश के पांच राष्ट्रीय सैन्य स्कूलों में भी दाखिला मिल सकेगा. सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि लड़कियों के प्रवेश के लिए शैक्षणिक सत्र 2022-23 से जरूरी ढांचागत और तार्किक बदलाव कर लिए जाएंगे. हलफनामे में बताया गया है कि 11.5 से 13 वर्ष की आयु के छात्र अखिल भारतीय प्रतियोगी परीक्षा पास करने के बाद सैन्य कॉलेजों में प्रवेश ले सकेंगे.

हर छह महीने में 5 लड़कियों को प्रवेश
हलफनामे में दी गई जानकारी के मुताबिक जनवरी 2023 से हर छह महीने में 5 लड़कियों को शामिल करना शुरू कर दिया जाएगा. इसके लिए लड़कियों को जून 2022 में प्रवेश परीक्षा देने की अनुमति दी जाएगी. केंद्र सरकार ने अपनी योजना के पहले चरण के बारे में बताते हुए कहा कि इसमें हर साल 20 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी. यह वृद्धि कुछ बुनियादी ढांचों पर भी असर डालेगी. लड़कियों को जनवरी 2028 से शुरू होने वाले कार्यकाल के लिए आरआईएमसी में प्रवेश के लिए जून 2027 में निर्धारित प्रवेश परीक्षा में भाग लेने की अनुमति होगी.

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बुनियादी ढांचा लड़कियों के अनुकूल 
सरकार ने आगे हलफनामे में कहा, बालिका कैडेटों के लिए उपयुक्त चिकित्सा मानकों और प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के अलावा, गोपनीयता, सुरक्षा प्रदान करने के लिए व्यवस्था में कई अन्य संशोधन और पुनर्गठन करने होंगे. ऐसे में अधिकारियों का एक बोर्ड इन सभी प्रासंगिक मुद्दों की जांच कर बदलाव का ढांचा तैयार कर रहा है. इसका मकसद यही है कि लड़कियों के अनुकूल सैन्य कॉलेजों के बुनियादी ढांचे को बदला जा सके. अब जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एम एम सुंदरेश की पीठ सरकार के हलफनामे की जांच करेगी.

First Published : 07 Oct 2021, 01:10:55 PM

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