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India China Tension: भारत का चीन को जवाब- एकतरफा तरीके से परिभाषित LAC स्वीकार नहीं

भारत (India) ने मंगलवार को चीन (China) के इस दृष्टिकोण को खारिज किया कि बीजिंग वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की अवधारणा पर 1959 के अपने रुख को मानता है.

News Nation Bureau | Edited By : Deepak Pandey | Updated on: 29 Sep 2020, 06:55:05 PM
indo china

भारत-चीनी सेना (Photo Credit: फाइल फोटो)

दिल्ली:

भारत (India) ने मंगलवार को चीन (China) के इस दृष्टिकोण को खारिज किया कि बीजिंग वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की अवधारणा पर 1959 के अपने रुख को मानता है. भारत ने साथ ही कहा कि पड़ोसी देश तथाकथित सीमा की ‘अपुष्ट एकतरफा’ व्याख्या करने से बचे. पूर्वी लद्दाख में लगभग पांच महीने से चले आ रहे गतिरोध के बीच चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि बीजिंग एलएसी की अवधारणा के बारे में 1959 के अपने रुख को मानता है.

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चीन के इस बयान पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने इस मुद्दे पर मीडिया के एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत ने कभी भी 1959 में एकतरफा रूप से परिभाषित तथाकथित वास्तविक नियंत्रण रेखा को स्वीकार नहीं किया है. यह स्थिति बरकरार रही है और चीनी पक्ष सहित सभी इस बारे में जानते हैं.

श्रीवास्तव की यह टिप्पणी तब आई जब चीनी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि चीन सात नवंबर 1959 को अपने तत्कालीन प्रधानमंत्री चाऊ एनलाई द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को भेजे गए एक पत्र में प्रस्तावित की गई एलएसी को मानता है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों का हवाला दिया जिनमें 1993 में एलएसी पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखने संबंधी समझौता, 1996 में विश्वास बहाली के कदमों से संबंधित समझौता और 2005 में सीमा मुद्दे के समाधान के लिए राजनीतिक मानकों तथा निर्धारक सिद्धांतों से संबंधित समझौता भी शामिल है. उन्होंने इन समझौतों का जिक्र यह बताने के लिए किया कि दोनों पक्षों ने एलएसी संरेखण पर पारस्परिक सहमति पर पहुंचने की प्रतिबद्धता जताई थी.

श्रीवास्तव ने कहा कि इसलिए, अब चीनी पक्ष का यह कहना, कि केवल एक ही एलएसी है, इन समझौतों में चीन द्वारा की गईं सभी प्रतिबद्धताओं के पूरी तरह विपरीत है. उन्होंने कहा कि भारतीय पक्ष ने एलएसी का हमेशा सम्मान और पालन किया है. संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हालिया संबोधन का जिक्र करते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि यह चीनी पक्ष है जिसने पश्चिमी सेक्टर के विभिन्न हिस्सों में एलएसी पर अतिक्रमण के अपने प्रयासों से यथास्थिति को एकतरफा ढंग से बदलने की कोशिश की है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि चीन ने पिछले कुछ महीनों में बार-बार दोहराया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में वर्तमान स्थिति का समाधान दोनों देशों के बीच हुए समझौतों के अनुरूप किया जाना चाहिए. श्रीवास्तव ने कहा कि 10 सितंबर को विदेश मंत्री और उनके चीनी समकक्ष के बीच हुए समझौते में भी चीनी पक्ष ने सभी मौजूदा समझौतों का पालन करने की अपनी कटिबद्धता दोहराई है. उन्होंने कहा कि इसलिए हम उम्मीद करते हैं कि चीनी पक्ष ईमानदारी से सभी समझौतों और सहमति का पूरी तरह पालन करेगा तथा एलएसी की एकतरफा अपुष्ट व्याख्या करने से बचेगा.

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गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने को लेकर भारत का विरोध

भारत (India) ने मंगलवार को कहा कि अगले महीने ‘तथाकथित गिलगित-बाल्टिस्तान’ विधानसभा क्षेत्र में चुनावों की घोषणा को लेकर उसने पाकिस्तान (Pakistan) से कड़ा विरोध दर्ज कराया है. भारत ने कहा कि इस्लामाबाद द्वारा क्षेत्र पर ‘अवैध’ कब्जे को छिपाने के लिए ‘दिखावे की कार्रवाई’ की जा रही है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस्लामाबाद द्वारा क्षेत्र में चुनाव कराने जैसे कार्यों से केंद्र शासित क्षेत्र जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हिस्से पर ‘अवैध कब्जे’ को न तो छिपाया जा सकता है न ही पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में लोगों के ‘घोर मानवाधिकार उल्लंघनों और शोषण’ की बात को ढंका जा सकता है.

पाकिस्तान ने घोषणा की है कि गिलगित बाल्तिस्तान के लिए चुनाव 15 नवंबर को होंगे. विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि भारत की सरकार ने पाकिस्तान की सरकार से कड़ा विरोध जताया है और कहा है कि संघ शासित क्षेत्र जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा इलाका जिसमें तथाकथित गिलगित और बाल्तिस्तान भी शामिल है, वह 1947 के विलय की संधि के मुताबिक भारत का अभिन्न अंग है.

विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान का उस क्षेत्र में कोई अधिकार नहीं है जिस पर उसने ‘अवैध और जबरन कब्जा’ कर रखा है. इसने कहा कि इस तरह के कार्यों से संघ शासित क्षेत्र जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हिस्से पर न तो अवैध कब्जे को छिपाया जा सकता है न ही सात दशकों से पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में रहने वाले लोगों के गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों, शोषण और स्वतंत्रता से वंचित किए जाने के मामले को ढंका जा सकता है.

विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये महज दिखावा वाले कार्य हैं, ताकि अवैध कब्जे को छिपाया जा सके. हम पाकिस्तान से अपील करते हैं कि वह अवैध कब्जे वाले सभी क्षेत्रों को तुरंत खाली करे. विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान से यह भी कहा कि वह अपने अधीन सभी अवैध कब्जे वाले स्थानों तो तुरंत खाली करे. गिलगित-बाल्टिस्तान में 18 अगस्त को चुनाव होने वाले थे लेकिन पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने कोरोना वायरस महामारी के कारण 11 जुलाई को चुनाव स्थगित कर दिए.

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First Published : 29 Sep 2020, 06:39:34 PM

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