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CJI रमना का बड़ा बयान, कंगारू कोर्ट चला रहा मीडिया, लोकतंत्र को ले जा रहा पीछे

News Nation Bureau | Edited By : Vijay Shankar | Updated on: 23 Jul 2022, 10:51:18 PM
CJI NV Ramana

CJI NV Ramana (Photo Credit: Twitter)

रांची:  

भारत के मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना (NV Ramana) ने शनिवार को वर्तमान न्यायपालिका के सामने आने वाले मुद्दों को सूचीबद्ध करते हुए कहा कि देश में कई मीडिया संगठन "कंगारू अदालतें चला रहे हैं. मुद्दों पर अनुभवी न्यायाधीशों को भी फैसला करना मुश्किल लगता है". रांची में नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (National university of study and research in law) में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए CJI ने कहा, “न्याय वितरण से जुड़े मुद्दों पर गलत जानकारी और एजेंडा संचालित बहस लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रही है. मीडिया द्वारा प्रचारित किए जा रहे पक्षपातपूर्ण विचार लोगों को प्रभावित कर रहे हैं और लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं. साथ ही व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं. इस प्रक्रिया में न्याय वितरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.”

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मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मीडिया अपनी जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर लोकतंत्र को पीछे ले जा रहा है. “प्रिंट मीडिया के पास अभी भी कुछ हद तक जवाबदेही है. जबकि, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की कोई जवाबदेही नहीं होती है. सोशल मीडिया अभी भी बदतर है. मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "मीडिया के लिए यह सबसे अच्छा है कि वे अपने शब्दों को आत्म-विनियमित और इसे मापने की कोशिश करें. आपको सरकार या अदालतों से हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. न्यायाधीश तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दे सकते हैं. कृपया इसे कमजोरी या लाचारी न समझें. जब स्वतंत्रता का उपयोग जिम्मेदारी से किया जाता है, तो उनके डोमेन के भीतर उचित या आनुपातिक बाहरी प्रतिबंध लगाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी.
CJI रमना ने कहा, न्यायाधीशों पर शारीरिक हमलों में वृद्धि के बारे में बोलते हुए CJI रमना ने जोर देकर कहा कि राजनेताओं, नौकरशाहों, पुलिस अधिकारियों और अन्य जन प्रतिनिधियों को उनकी नौकरी की संवेदनशीलता के कारण सेवानिवृत्ति के बाद भी अक्सर सुरक्षा प्रदान की जाती थी. विडंबना यह है कि न्यायाधीशों को समान रूप से  संरक्षण नहीं दिया जाता है. CJI ने कहा, इन दिनों हम न्यायाधीशों पर शारीरिक हमलों की बढ़ती संख्या देख रहे हैं. न्यायाधीशों को बिना किसी सुरक्षा या सुरक्षा के आश्वासन के उसी समाज में रहना होगा, जिसमें उन्हें दोषी ठहराया गया है.

CJI ने यह भी बताया कि वर्तमान समय की न्यायपालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती निर्णय के लिए मामलों को प्राथमिकता देना है. “न्यायाधीश सामाजिक वास्तविकताओं से आंखें नहीं मूंद सकते. व्यवस्था को टालने योग्य संघर्षों और बोझ से बचाने के लिए न्यायाधीश को दबाव वाले मामलों को प्राथमिकता देनी होगी. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायिक रिक्तियों को न भरना और बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं करना देश में लंबित मामलों के मुख्य कारण हैं. 

First Published : 23 Jul 2022, 10:51:18 PM

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