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CAA के खिलाफ दाखिल 237 याचिकाओं पर आज से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, CJI चंद्रचूड़ की बेंच के पास है मामला

CAA: नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ दायर 237 याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय आज (मंगलवार) से सुनवाई शुरू करेगा.

Updated on: 19 Mar 2024, 06:50 AM

highlights

  • CAA के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर आज से SC में सुनवाई
  • सीएए के खिलाफ दाखिल हैं 237 याचिकाएं
  • सीजेआई चंद्रचूड़ की बैंच करेगी याचिकाओं पर सुनवाई

नई दिल्ली:

CAA: नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के देशभर में लागू होने के इसे लेकर विरोध भी देखने को मिला. इसके साथ ही सीएए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 237 से अधिक में याचिकाएं भी दाखिल की गई. जिन पर सुप्रीम कोर्ट आज यानी मंगलवार को सुनवाई करेगा. नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ दाखिल इन याचिकाओं पर स्‍वयं चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच सुनवाई करेगी. सीजेआई की इस बैंच में उनके अलावा दो अन्‍य न्यायाधीश भी होंगे.

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2019 में संसद में पास हुआ था सीएए

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून संसद के दोनों सदनों- लोकसभा और राज्यसभा में दिसंबर 2019 में पास हो गया था. तब सीएए के खिलाफ कई याचिकाएं दाखिल की गई थी. केंद्र सरकार ने 11 मार्च 2024 को सीएए के नियमों को अधिसूचित किया. इसके बाद एक बार फिर से नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई. साथ ही इन याचिकाओं पर जल्द सुनवाई करने का भी अनुरोध किया गया. इन याचिकाओं में सीएए को धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाला और संविधान के खिलाफ बताया गया.

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क्या है सरकार का सीएए पर तर्क

केंद्र सरकार ने बीते मंगलवार को देशभर में नागरिकता संशोधन कानून लागू कर दिया. सीएए के प्रावधानों के मुताबिक, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत में आए गैर मुस्लिमों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है. सीएए में मुस्लिम समाज को शामिल न करने की वजह से इसे मुस्लिम विरोधी कहा जा रहा है. हालांकि गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि सीएए से किसी भारतीय की नागरिकता नहीं आएगी. बल्कि ये कानून नागरिकता देने वाला है. गृह मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय मुसलमानों को सीएए से चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. क्योंकि नागरिकता संशोधन अधिनियम उनकी नागरिकता को प्रभावित नहीं करेगा.

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दस्तावेज पेश करने की नहीं होगी जरूरत

इसके साथ ही गृह मंत्रालय का कहना है कि इस अधिनियम के बाद किसी भी भारतीय नागरिक को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कोई दस्तावेज पेश करने की जरूरत नहीं होगी. खासकर भारतीय मुसलमानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सीएए में उनकी नागरिकता को प्रभावित करने का कोई प्रावधान नहीं है. इसका वर्तमान 18 करोड़ भारतीय मुसलमानों से कोई लेना-देना नहीं है और उनके पास भी हिंदूओं के बराबर अधिकार हैं.