‘वी द पीपल से शुरू होता है संविधान, भारत माता से नहीं’, बोले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी; छिड़ी नई बहस

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान के बाद संविधान और राष्ट्रवाद की परिभाषा पर बहस तेज हो गई है. उन्होंने कहा कि देश की पहचान “वी द पीपल” से है, न कि किसी धार्मिक नारे से.

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान के बाद संविधान और राष्ट्रवाद की परिभाषा पर बहस तेज हो गई है. उन्होंने कहा कि देश की पहचान “वी द पीपल” से है, न कि किसी धार्मिक नारे से.

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Deepak Kumar
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भारत में संविधान और राष्ट्रवाद की परिभाषा को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयान ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है. तेलंगाना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि भारतीय संविधान की शुरुआत “वी द पीपल” यानी “हम भारत के लोग” शब्दों से होती है, न कि भारत माता या किसी धार्मिक या सांस्कृतिक प्रतीक के नाम से.

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संविधान को लेकर क्या बोले ओवैसी?

असदुद्दीन ओवैसी ने जोर देकर कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी भी प्रदान करता है. उनके अनुसार भारत का संविधान समावेशी और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर आधारित है. प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता की बात कही गई है, जो देश की मूल भावना को दर्शाती है.

ओवैसी ने संसद में “वंदे मातरम” की 150वीं वर्षगांठ पर हुई बहस का भी जिक्र किया. उन्होंने याद दिलाया कि 24 जनवरी 1950 को भारत ने खुद को संविधान दिया था, जिसकी शुरुआत “वी द पीपल” से होती है. उनका कहना था कि संविधान किसी एक धार्मिक पहचान को सर्वोपरि नहीं मानता, बल्कि जनता को ही सर्वोच्च स्थान देता है.

उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि हर नागरिक को अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता है. यही भारत की सबसे बड़ी संवैधानिक ताकत है.

देशभक्ति को धर्म से जोड़ना गलत- AIMIM प्रमुख

ओवैसी ने देशभक्ति को किसी एक धर्म से जोड़ने पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि ऐसा करने से स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले कई नेताओं के बलिदान को नजरअंदाज किया जाएगा. उन्होंने बहादुर शाह जफर और यूसुफ मेहरअली जैसे नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि राष्ट्र प्रेम किसी एक धर्म तक सीमित नहीं हो सकता.

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