National Herald Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने बढ़ाई सोनिया-राहुल की मुश्किल, ED की याचिका पर भेजा नोटिस

National Herald Case: ईडी ने नेशनल हेराल्ड केस में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत चार्जशीट दाखिल की थी. हालांकि, राउज एवेन्यू कोर्ट ने यह कहते हुए चार्जशीट पर संज्ञान लेने से मना कर दिया कि मामला एक निजी शिकायत से जुड़ा है

National Herald Case: ईडी ने नेशनल हेराल्ड केस में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत चार्जशीट दाखिल की थी. हालांकि, राउज एवेन्यू कोर्ट ने यह कहते हुए चार्जशीट पर संज्ञान लेने से मना कर दिया कि मामला एक निजी शिकायत से जुड़ा है

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Dheeraj Sharma
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National Herald Case: नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और सोनिया गांधी को बड़ा कानूनी झटका लगा है. दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर दोनों नेताओं समेत सात आरोपियों को नोटिस जारी किया है. यह नोटिस उस फैसले के खिलाफ जारी किया गया है, जिसमें राउज एवेन्यू कोर्ट ने ईडी की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था.

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राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला क्यों बना मुद्दा

ईडी ने नेशनल हेराल्ड केस में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत चार्जशीट दाखिल की थी. हालांकि, राउज एवेन्यू कोर्ट ने यह कहते हुए चार्जशीट पर संज्ञान लेने से मना कर दिया कि मामला एक निजी शिकायत से जुड़ा है, जिस पर पहले ही अदालत संज्ञान ले चुकी है. इसी आदेश को चुनौती देते हुए ईडी ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

दिल्ली हाईकोर्ट की कार्रवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने ईडी की दलीलों को सुनने के बाद राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अन्य आरोपियों को नोटिस जारी किया है. अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 मार्च की तारीख तय की है. हाईकोर्ट का यह कदम यह संकेत देता है कि निचली अदालत के फैसले की गहन समीक्षा की जाएगी.

ईडी की ओर से क्या दलील दी गई

सुनवाई के दौरान ईडी की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में जोरदार दलीलें पेश कीं. उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यह सामने आया है कि केवल 50 लाख रुपये के बदले लगभग 2000 करोड़ रुपये की संपत्तियां हासिल की गईं. तुषार मेहता ने यह भी बताया कि ईडी ने मामले में विस्तृत जांच की है, कई जगहों पर छापेमारी की गई, दस्तावेज जुटाए गए और आरोपियों के बयान दर्ज किए गए हैं.

कानूनी सवाल जो कोर्ट के सामने उठे

सॉलिसिटर जनरल ने यह सवाल भी उठाया कि अगर किसी निजी शिकायत पर अदालत ने संज्ञान लिया है, तो क्या इससे ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करने से रोका जा सकता है. उनका कहना था कि निचली अदालत का यह निष्कर्ष कानून की गलत व्याख्या पर आधारित है और इससे भविष्य में कई अन्य मामलों पर भी असर पड़ सकता है.

आगे क्या हो सकता है

दिल्ली हाईकोर्ट में अब यह तय होगा कि क्या राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला सही था या नहीं. इस मामले का असर केवल नेशनल हेराल्ड केस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह ईडी की शक्तियों और निजी शिकायतों से जुड़े कानून की व्याख्या को भी प्रभावित कर सकता है. राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से यह मामला आने वाले समय में काफी अहम रहने वाला है.

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