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डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
Modi trade deals 2025-2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत ने पिछले पांच महीनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण समझौते किए हैं.अनुमान है कि इनमें पांच प्रमुख समेत छोटी-बड़ी कुल 30 से अधिक इंटरनेशनल डील्स शामिल हैं.ये डील्स देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और वैश्विक व्यापार में देश की स्थिति को मजबूत करने वाले साबित हो रही हैं.
जानकारी के अनुसार सितंबर 2025 से जनवरी 2026 तक भारत ने यूरोपीय संघ (EU), अमेरिका, न्यूजीलैंड और ओमान जैसे देशों के साथ डील्स फाइनल कीं हैं.इनमें से EU के साथ हुआ समझौता 'मदर ऑफ ऑल डील्स' सबसे बड़ा समझौता रहा.जिसे अमेरिका को भी भारत पर लगे टैरिफ को कम करने के लिए मजबूर किया है.आइए जानते हैं बीते कुछ माह में हुई कुछ प्रमुख डील्स की डिटेल्स, उनके फायदे और EU डील का 2 फरवरी को हुए अमेरिकी समझौते पर क्या दबाव रहा।
Wonderful to speak with my dear friend President Trump today. Delighted that Made in India products will now have a reduced tariff of 18%. Big thanks to President Trump on behalf of the 1.4 billion people of India for this wonderful announcement.
— Narendra Modi (@narendramodi) February 2, 2026
When two large economies and the…
सरकार के समझौतों के जरिए देश को एक विश्वसनीय ट्रेड पार्टनर के रूप में किया पेश
पिछले पांच महीनों में भारत ने चार प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समझौते किए हैं जो मुख्य रूप से ट्रेड, निवेश और रणनीतिक साझेदारी पर केंद्रित हैं.ये डील्स ऐसे समय में हुईं जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताएं बढ़ रही हैं.खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियां चर्चा का केंद्र हैं.मोदी सरकार ने इन समझौतों के जरिए भारत को एक विश्वसनीय ट्रेड पार्टनर के रूप में पेश किया है जिससे निर्यात बढ़ने और घरेलू उद्योगों को फायदा होने की उम्मीद है।
प्रमुख डील्स और उनके फायदे
भारत-EU की फ्री ट्रेड एग्रीमेंट सबसे बड़ा कदम है
यह सबसे बड़ा समझौता है, जिसे EU कमिशन प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 'मदर ऑफ ऑल डील्स' का नाम दिया है.बताया जा रहा है कि लगभग दो दशकों की बातचीत के बाद फाइनल हुई ये डील 2 अरब लोगों की मार्केट को कवर करती है.इस डील से टैरिफ्स में 96% तक की कटौती होगी, जिससे भारतीय टेक्सटाइल, फार्मा और आईटी सेक्टर को यूरोप में आसान एक्सेस मिल सकेगा और सालाना करीब 36,000 करोड़ रुपये की बचत होगी.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील ने कारोबारियों की हो गई बल्ले-बल्ले
ट्रंप और मोदी की फोन बातचीत के बाद अनाउंस हुई यह डील पिछले महीनों की टेंशन को कम करती है.अमेरिका ने भारतीय गुड्स पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया है.बदले में भारत रूसी ऑयल न खरीदने और अमेरिकी प्रोडक्ट्स (एनर्जी, एग्रीकल्चर) ज्यादा खरीदने पर सहमत हुआ है.इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को राहत मिलेगी.बता दें य डील नेगोशिएशन्स का हिस्सा थी जो सितंबर 2025 से चल रही थीं.
भारत-न्यूजीलैंड ट्रेड एग्रीमेंट से होगा ये फायदा
इस डील का मकसद द्विपक्षीय ट्रेड को 2030 तक डबल करना है.ये एग्रीकल्चर पर फोकस है.इसके अलावा टेक्नोलॉजी और सर्विसेस, भारतीय किसानों और एसएमई को नई मार्केट मिलेगी.
भारत-ओमान कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट ने बदल दी सूरत
18 दिसंबर को साइन हुई यह डील गल्फ रीजन में भारतीय प्रोडक्ट्स को कॉम्पिटिटिव बनाती है.इससे टैरिफ कट्स होंगे जिससे एक्सपोर्ट बढ़ेगा.इस डील से एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी साथ ही मिडिल ईस्ट में भारत की ट्रेड प्रेजेंस बढ़ेगी.
'मदर ऑफ ऑल डील्स' ने कैसे अमेरिकी सरकार को झकझोरा
EU के साथ 'मदर ऑफ ऑल डील्स' ने अमेरिका के साथ ट्रेड नेगोशिएशन्स को स्पीड दी है.बाजार के विशेषज्ञों की मानें तो EU डील के ऐलान के कुछ दिनों बाद ही अमेरिकी पैक्ट अनाउंस हुआ है, जो संकेत देता है कि ट्रंप प्रशासन ने भारत को खोने का रिस्क नहीं लिया.पहले अमेरिका ने रूसी ऑयल पर पेनल्टी टैरिफ लगाकर भारत को दबाव में रखा था लेकिन EU डील ने भारत को अल्टरनेटिव मार्केट दी जिससे अमेरिका को अपना स्टैंड सॉफ्ट करना पड़ा.
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