भारत सरकार ने जारी की पहली एंटी टेरर पॉलिसी 'प्रहार', जानें कैसे देश के खिलाफ शक्तियों से निपटने में आएगी काम

मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ने देश की पहली व्यापक एंटी-टेरर पॉलिसी जारी की है. इस पॉलिसी को नाम दिया गया है ‘PRAHAAR'.  यह रणनीति दस्तावेज आतंकवाद के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है.

मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ने देश की पहली व्यापक एंटी-टेरर पॉलिसी जारी की है. इस पॉलिसी को नाम दिया गया है ‘PRAHAAR'.  यह रणनीति दस्तावेज आतंकवाद के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है.

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Dheeraj Sharma
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India First Anit Terror Policy PRAHAR

मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ने देश की पहली व्यापक एंटी-टेरर पॉलिसी जारी की है. इस पॉलिसी को नाम दिया गया है ‘PRAHAAR'.  यह रणनीति दस्तावेज आतंकवाद के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. इसमें साफ कहा गया है कि भारत आतंकवाद को किसी धर्म, नस्ल या राष्ट्रीयता से नहीं जोड़ता, बल्कि इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए साझा खतरा मानता है. 

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पॉलिसी के मुताबिक भारत को जमीन, पानी और हवा तीनों माध्यमों से आतंकी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. क्रॉस बॉर्डर आतंकवाद के साथ-साथ साइबर हमले और संगठित आपराधिक नेटवर्क की भूमिका को भी गंभीर खतरे के रूप में रेखांकित किया गया है. 

साइबर स्पेस और डार्क वेब पर बढ़ता खतरा

‘प्रहार’ में डिजिटल मोर्चे पर बढ़ती चुनौतियों को विस्तार से बताया गया है. आतंकी संगठन अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्स, क्रिप्टो वॉलेट और डार्क वेब का इस्तेमाल फंडिंग और ऑपरेशनल गाइडेंस के लिए कर रहे हैं.

नीति दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि एनॉनिमस ऑनलाइन गतिविधियां जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन रही हैं. इसके अलावा CBRNED (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, एक्सप्लोसिव और डिजिटल) सामग्री तक पहुंच को रोकना काउंटर टेरर एजेंसियों की प्राथमिकता होगी. ड्रोन और रोबोटिक्स के दुरुपयोग की आशंका को भी गंभीर सुरक्षा जोखिम बताया गया है.

युवाओं में कट्टरपंथ रोकने पर जोर

नीति में यह स्वीकार किया गया है कि आतंकी समूह भारतीय युवाओं को भर्ती करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. पहचान होने पर ऐसे मामलों में पुलिस की ‘ग्रेडेड कार्रवाई’ का प्रावधान रखा गया है.

साथ ही सामाजिक और धार्मिक नेताओं की सकारात्मक भूमिका पर भी जोर दिया गया है. मॉडरेट प्रचारकों और एनजीओ के जरिए कट्टरपंथ और चरमपंथी हिंसा के दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता फैलाने की बात कही गई है.

वैश्विक नेटवर्क और भारत की तैयारी

दस्तावेज में अल कायदा और इस्लामिक स्टेट ऑफ ईराक और सीरिया जैसे वैश्विक आतंकी संगठनों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि स्लीपर सेल और स्थानीय नेटवर्क के जरिए भारत में अस्थिरता फैलाने की कोशिशें की गई हैं. 

‘प्रहार’ ट्रांसनेशनल आतंकवाद से निपटने के लिए राष्ट्रीय उपायों के साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग पर भी जोर देता है. इसमें स्पष्ट किया गया है कि विदेश में बैठे आतंकी समूह स्थानीय लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और भौगोलिक जानकारी का सहारा लेकर हमलों की साजिश रच रहे हैं.

कुल मिलाकर, यह नीति दस्तावेज़ भारत की सुरक्षा रणनीति को अधिक समन्वित, तकनीकी रूप से सक्षम और वैश्विक सहयोग पर आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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