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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) साल 2026 की पहली और बेहद अहम लॉन्चिंग आज (12 जनवरी) करने जा रहा है. यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के लॉन्च पैड-1 से सुबह 10:17 बजे होगा. इस मिशन के साथ ही भारत अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करेगा. बता दें कि इस मिशन में PSLV-C62 रॉकेट का इस्तेमाल किया जाएगा, जो PSLV-DL वैरिएंट का 64वां मिशन है. रॉकेट के जरिए पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-N1 को उसकी निर्धारित 505 किलोमीटर ऊंची सन-सिंक्रोनस कक्षा में स्थापित किया जाएगा. EOS-N1 इस मिशन का मुख्य पेलोड है, जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के लिए तैयार किया गया है. इसके साथ ही कुल 15 अन्य सह-यात्री उपग्रह भी अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे.
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— ISRO (@isro) January 10, 2026
🗓️ 12 Jan 2026
🕘 09:47 IST onwards
🚀 Liftoff at 10:17 IST
Livestream link:https://t.co/fMiIFTUGpf
For more information Visit:https://t.co/3ijojDaYB2#PSLVC62#EOSN1#ISRO#NSIL
रक्षा क्षमताओं को मिलेगी मजबूती
EOS-N1 को ‘अन्वेषा’ भी कहा जा रहा है. यह लगभग 400 किलोग्राम वजन का हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट है. इसमें 12 मीटर की हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग क्षमता है, जिससे यह रक्षा निगरानी, सीमा सुरक्षा, कृषि आकलन, शहरी नक्शांकन और पर्यावरण पर नजर रखने में मदद करेगा. जानकारों के अनुसार, मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में यह उपग्रह भारत को रियल टाइम खुफिया जानकारी देने में बेहद उपयोगी साबित होगा.
KID उपग्रह भी शामिल
इस मिशन में एक खास उपग्रह KID (Kestrel Initial Technology Demonstrator) भी शामिल है. यह स्पेनिश स्टार्टअप द्वारा विकसित 25 किलोग्राम का री-एंट्री टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर है, जिसका परीक्षण पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश और दक्षिण प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन के जरिए किया जाएगा. इसके अलावा भारत, मॉरीशस, लक्जमबर्ग, यूएई, सिंगापुर, यूरोप और अमेरिका के कई व्यावसायिक और शोध उपग्रह भी इस मिशन का हिस्सा हैं.
PSLV-C62 will carry EOS-N1 and 15 co-passenger satellites.
— ISRO (@isro) January 11, 2026
EOS-N1 and 14 co-passengers are planned for injection into Sun Synchronous Orbit; the KID capsule is planned for a re-entry trajectory.
🗓️ 12 Jan 2026 | 🕘 09:45 IST onwards
🚀 Liftoff at 10:18:30 IST
Livestream link:… pic.twitter.com/PZrd1CpgR8
PSLV ने कई मिशनों में दिलाई सफलता
PSLV को ISRO का ‘वर्क हॉर्स’ कहा जाता है. अब तक इसकी 63 उड़ानों में चंद्रयान-1, मंगल ऑर्बिटर मिशन और आदित्य-एल1 जैसे बड़े अभियानों को सफलता मिली है. 2017 में एक साथ 104 उपग्रह लॉन्च करने का विश्व रिकॉर्ड भी इसी रॉकेट के नाम है. पिछले साल PSLV-C61 मिशन की असफलता के बाद यह लॉन्च ISRO के लिए खास महत्व रखता है. पूरे मिशन की अवधि करीब 1 घंटा 48 मिनट रहने की उम्मीद है.
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