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Photograph: (ISRO)
ISRO EOS-N1 Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) नए साल में अपना पहला बड़ा मिशन लॉन्च करने जा रहा है. सोमवार यानी 12 जनवरी की सुबह 10:17 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C62 रॉकेट का प्रक्षेपण होगा. इस मिशन का मुख्य उद्देश्य EOS-N1 उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित करना है, जिसे कोड नाम ‘अन्वेषा’ दिया गया है. यह सैटेलाइट भारत की निगरानी और सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगा.
हाइपरस्पेक्ट्रल तकनीक का इस्तेमाल
EOS-N1 एक नई पीढ़ी का अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है. इसमें हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. यह तकनीक धरती की सतह को सैकड़ों अलग-अलग प्रकाश बैंड्स में देख सकती है, जिससे बेहद बारीक जानकारी मिलती है. इस सैटेलाइट को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के सहयोग से तैयार किया गया है. इसके डिजाइन और तकनीक में भारतीय निजी स्पेस कंपनी पिक्सेल की भी अहम भूमिका रही है.
The magic behind the mission - here're the glimpses of the PSLV C62 integration with EOS-N1 along with 15 co-passenger satellites!
— ISRO InSight (@ISROSight) January 8, 2026
Every stage assembled with precision, passion, and purpose.
Launch scheduled for: 🚀
🗓️ January 12, 2026
🕥 at 10:17 AM IST pic.twitter.com/1MbYlG77yF
आसान शब्दों में समझें तो पारंपरिक सैटेलाइट केवल कुछ रंगों में तस्वीरें लेते हैं, जबकि हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट हर चीज की अलग “लाइट पहचान” बनाता है. इससे पौधों की सेहत, मिट्टी की नमी, पानी में प्रदूषण, खनिजों की मौजूदगी और तेल रिसाव जैसी चीजों का सही-सही पता लगाया जा सकता है.
इन क्षेत्रों को होगा बड़ा फायदा
EOS-N1 का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में होगा. खेती में इससे फसल की स्थिति, रोग और कीटों की जानकारी मिलेगी. आपदा प्रबंधन में बाढ़, सूखा और जंगल की आग पर नजर रखी जा सकेगी. पर्यावरण संरक्षण, शहरी योजना और मौसम से जुड़ी जानकारी में भी यह मददगार साबित होगा. रक्षा क्षेत्र में यह सैटेलाइट “आसमान में आंख” की तरह काम करेगा और सीमाओं पर गतिविधियों की निगरानी में सेना को सहायता देगा.
PSLV-C62 / EOS-N1 Mission launch is scheduled on
— ISRO (@isro) January 9, 2026
🗓️ 12 Jan 2026 | ⏰ 10:17 IST
from the First Launch Pad (FLP), SDSC-SHAR, Sriharikota.
PSLV-C62 will carry EOS-N1 and 15 co-passenger satellites.
For more information Visit:https://t.co/3ijojDaYB2#PSLVC62#EOSN1#ISRO#NSIL
यह सैटेलाइट लो अर्थ ऑर्बिट में करीब 500 से 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर काम करेगा और रोज बड़े इलाकों की हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें भेज सकेगा.
PSLV-C62 के जरिए एक साथ 19 सैटेलाइट्स होंगे लॉन्च
PSLV-C62 मिशन की खास बात यह है कि इसमें EOS-N1 के साथ 18 अन्य छोटे सैटेलाइट भी लॉन्च किए जाएंगे. इनमें भारतीय विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और विदेशी एजेंसियों के उपग्रह शामिल हैं.
Meet PSLV-C62 - the 64th flight of PSLV and the 5th mission of the PSLV-DL variant.
— ISRO (@isro) January 11, 2026
Vehicle highlights: 44.4 m tall | Lift-off mass 260 t | 4 stages.
🗓️ 12 Jan 2026 | 🕘 09:48 IST onwards
🚀 Liftoff at 10:18:30 IST
Livestream link: https://t.co/fMiIFTUGpf
For more… pic.twitter.com/I9z16gQpsv
कुल मिलाकर, ‘अन्वेषा’ का प्रक्षेपण भारत की अंतरिक्ष क्षमता को नई दिशा देगा और रक्षा के साथ-साथ आम लोगों से जुड़े क्षेत्रों में भी बड़ा बदलाव लाएगा.
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