ISRO EOS-N1 Mission: इसरो का बड़ा मिशन; कल लॉन्च होगा EOS-N1 ‘अन्वेषा’, सुरक्षा और निगरानी को मिलेगी नई ताकत

ISRO EOS-N1 Mission: इसरो 12 जनवरी को PSLV-C62 मिशन के तहत EOS-N1 ‘अन्वेषा’ सैटेलाइट लॉन्च करेगा. यह उन्नत हाइपरस्पेक्ट्रल तकनीक से सुरक्षा, खेती, मौसम, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण निगरानी को नई मजबूती देगा.

ISRO EOS-N1 Mission: इसरो 12 जनवरी को PSLV-C62 मिशन के तहत EOS-N1 ‘अन्वेषा’ सैटेलाइट लॉन्च करेगा. यह उन्नत हाइपरस्पेक्ट्रल तकनीक से सुरक्षा, खेती, मौसम, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण निगरानी को नई मजबूती देगा.

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Deepak Kumar
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ISRO Mission

Photograph: (ISRO)

ISRO EOS-N1 Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) नए साल में अपना पहला बड़ा मिशन लॉन्च करने जा रहा है. सोमवार यानी 12 जनवरी की सुबह 10:17 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C62 रॉकेट का प्रक्षेपण होगा. इस मिशन का मुख्य उद्देश्य EOS-N1 उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित करना है, जिसे कोड नाम ‘अन्वेषा’ दिया गया है. यह सैटेलाइट भारत की निगरानी और सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगा.

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हाइपरस्पेक्ट्रल तकनीक का इस्तेमाल

EOS-N1 एक नई पीढ़ी का अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है. इसमें हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. यह तकनीक धरती की सतह को सैकड़ों अलग-अलग प्रकाश बैंड्स में देख सकती है, जिससे बेहद बारीक जानकारी मिलती है. इस सैटेलाइट को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के सहयोग से तैयार किया गया है. इसके डिजाइन और तकनीक में भारतीय निजी स्पेस कंपनी पिक्सेल की भी अहम भूमिका रही है.

आसान शब्दों में समझें तो पारंपरिक सैटेलाइट केवल कुछ रंगों में तस्वीरें लेते हैं, जबकि हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट हर चीज की अलग “लाइट पहचान” बनाता है. इससे पौधों की सेहत, मिट्टी की नमी, पानी में प्रदूषण, खनिजों की मौजूदगी और तेल रिसाव जैसी चीजों का सही-सही पता लगाया जा सकता है.

इन क्षेत्रों को होगा बड़ा फायदा

EOS-N1 का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में होगा. खेती में इससे फसल की स्थिति, रोग और कीटों की जानकारी मिलेगी. आपदा प्रबंधन में बाढ़, सूखा और जंगल की आग पर नजर रखी जा सकेगी. पर्यावरण संरक्षण, शहरी योजना और मौसम से जुड़ी जानकारी में भी यह मददगार साबित होगा. रक्षा क्षेत्र में यह सैटेलाइट “आसमान में आंख” की तरह काम करेगा और सीमाओं पर गतिविधियों की निगरानी में सेना को सहायता देगा.

यह सैटेलाइट लो अर्थ ऑर्बिट में करीब 500 से 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर काम करेगा और रोज बड़े इलाकों की हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें भेज सकेगा.

PSLV-C62 के जरिए एक साथ 19 सैटेलाइट्स होंगे लॉन्च

PSLV-C62 मिशन की खास बात यह है कि इसमें EOS-N1 के साथ 18 अन्य छोटे सैटेलाइट भी लॉन्च किए जाएंगे. इनमें भारतीय विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और विदेशी एजेंसियों के उपग्रह शामिल हैं.

कुल मिलाकर, ‘अन्वेषा’ का प्रक्षेपण भारत की अंतरिक्ष क्षमता को नई दिशा देगा और रक्षा के साथ-साथ आम लोगों से जुड़े क्षेत्रों में भी बड़ा बदलाव लाएगा.

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