फेल हुआ ISRO का मिशन 'अन्वेषा'; लॉन्चिंग के बाद आई तकनीकी खराबी, ऑरबिट में तैनात नहीं हो सकी सैटेलाइट

इसरो ने PSLV-C62 से अन्वेषा (EOS-N1) सैटेलाइट को लॉन्च कर दिया है. इस बीच इसमें तकनीकी समस्या सामने आई है. फिलहाल इसरो की पूरी टीम जांच में जुटी हुई है.

इसरो ने PSLV-C62 से अन्वेषा (EOS-N1) सैटेलाइट को लॉन्च कर दिया है. इस बीच इसमें तकनीकी समस्या सामने आई है. फिलहाल इसरो की पूरी टीम जांच में जुटी हुई है.

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Deepak Kumar
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ISRO Mission EOS-09 if Success then what happened of India

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) ने आज यानि सोमवार सुबह 10.18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के वर्ष 2026 का पहला सैटेलाइट मिशन लॉन्च किया था. यह लॉन्च पोलर सैटेलाइट लॉच व्हीकल (PSLV)-C 62 से किया गया. इस दौरान अंतिम समय में कुछ तकनीकी गड़बड़ी आ गई, जिसके कारण ये सैटेलाइट अपने ऑर्बिट में तैनात नहीं हो सकी. ऐसे में ये मिशन फेल माना जा रहा है. हालांकि, इसरो की टीम फिलहाल समस्या का पता लगा रही है.

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ISRO ने सुबह 10:17 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C62 रॉकेट के जरिए साल 2026 का पहला सैटेलाइट मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च किया था. इस मिशन में भारत का अहम अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-N1 ‘अन्वेषा’ समेत कुल 15 उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे गए.

आपको बता दें कि EOS-N1 ‘अन्वेषा’ को धरती से करीब 600 किलोमीटर ऊपर पोलर सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा. यह उपग्रह सीमा निगरानी, घुसपैठ की पहचान, छिपे हुए ठिकानों पर नजर और पर्यावरण मॉनिटरिंग में अहम भूमिका निभाएगा. इसकी क्षमता इतनी उन्नत है कि यह जंगलों, बंकरों और दुर्गम इलाकों में छिपे लक्ष्यों की भी स्पष्ट तस्वीरें लेने में सक्षम है. इसी वजह से इसे भारत का “अंतरिक्ष से नजर रखने वाला सीसीटीवी” भी कहा जा रहा है.

क्या बोले इसरो चीफ?

इसरो चीफ ने अन्वेषा सैटेलाइट की लॉन्चिंग फेल होने के बाद बयान जारी किया है. इसरो चीफ ने बताया, "तीसरे स्टेज में दिक्कत आई और दिशा में परिवर्तन हो गया. डेटा एनालिसिस किया जा रहा है, जो भी अपडेट आएगा बताया जाएगा."

अन्वेषा की खासियत क्या है?

EOS-N1 को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है. यह एक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट है, जो हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग तकनीक पर काम करता है. यह तकनीक रोशनी के कई स्पेक्ट्रम को पहचानकर बेहद बारीक जानकारी जुटाने में मदद करती है. इससे आतंकियों की गतिविधियों, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी, घुसपैठ और संदिग्ध निर्माण पर नजर रखना आसान होगा. यह सैटेलाइट भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक तरह का गुप्त हथियार साबित होगा.

अन्य उपग्रह भी हुए लॉन्च

PSLV-C62 मिशन के तहत EOS-N1 के अलावा 14 अन्य छोटे उपग्रह भी अंतरिक्ष में भेजे गए हैं. इनमें भारत के साथ-साथ फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और ब्रिटेन जैसे देशों के उपग्रह शामिल हैं. यह मिशन ISRO की वाणिज्यिक इकाई न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के माध्यम से किया गया है.

PSLV का मजबूत कमबैक

यह मिशन पिछले वर्ष की असफलता के बाद PSLV की बड़ी वापसी माना जा रहा है. इस सफल लॉन्च के साथ ISRO ने 2026 के अपने अंतरिक्ष मिशनों की शानदार शुरुआत कर दी है और भारत की अंतरिक्ष व सुरक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई दी है.

यह भी पढ़ें- ISRO का 2026 का पहला मिशन; आज होगी PSLV-C62 से EOS-N1 ‘अन्वेषा’ की ऐतिहासिक लॉन्चिंग

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