आईएनएस तुशिल नौ दिसंबर को नौसेना में शामिल हो चुका है. यह रूस के कलिनिनग्राद में यंतर शिपयार्ड में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था. इसके फरवरी के मध्य में देश के पश्चिमी तट पर पहुंचने की उम्मीद है. इसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में शामिल किया गया था. उन्होंने युद्धपोत को भारत की बढ़ती समुद्री ताकत का "गौरवपूर्ण प्रमाण" और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही दोस्ती में "महत्वपूर्ण मील का पत्थर" बताया था.
खाड़ी में समुद्री डकैती रोधी गश्त भी करेगा
भारत और मोरक्को के बीच द्विपक्षीय संबंधों और नौसैनिक सहयोग को मजबूत करने के हिस्से के रूप में आईएनएस तुशिल भारत के रास्ते में 27 दिसंबर को कैसाब्लांका, मोरक्को पहुंचा. अफसरों ने कहा कि युद्धपोत भारत पहुंचने से पहले पश्चिमी अफ्रीकी तट के पास गिनी की खाड़ी में समुद्री डकैती रोधी गश्त भी करेगा. अक्टूबर 2023 में भारत और यूरोपीय संघ ने समुद्री डकैती से लड़ने समेत समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने को लेकर गिनी की खाड़ी में अपना पहला नौसैनिक अभ्यास किया.
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तुशिल में स्वदेशी सामग्री लगभग 26% है, जो पिछले टेग-श्रेणी के युद्धपोतों की तुलना में दोगुनी है. इसमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, ब्रह्मोस एयरोस्पेस और नोवा इंटीग्रेटेड सिस्टम्स (टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी) सहित 33 फर्मों का योगदान शामिल है. तुशिल भारतीय नौसेना के लिए चार और क्रिवाक/तलवार श्रेणी के स्टील्थ फ्रिगेट के लिए रूस के साथ 2.5 बिलियन डॉलर से अधिक के सौदे का हिस्सा है. जिनमें से दो का निर्माण यंतर शिपयार्ड में किया जाना था और शेष दो का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में किया जाएगा.
आईएनएस तुशिल को सभी चार आयामों - वायु, सतह, पानी के नीचे और विद्युत चुम्बकीय में डिज़ाइन किया गया है. यह कई उन्नत हथियारों से लैस है. इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें, उन्नत रेंज वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, टॉरपीडो शामिल हैं.