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अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (20 फरवरी) को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी आयात शुल्क (टैरिफ) को गैरकानूनी करार दिया है. इस फैसले के बाद भारत सरकार ने पहली बार आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है. भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि वह अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके संभावित प्रभावों का बारीकी से अध्ययन कर रहा है. मंत्रालय के अनुसार, अदालत के आदेश और अमेरिकी प्रशासन की आगे की नीतियों को समझने के बाद ही कोई ठोस रुख अपनाया जाएगा. इससे साफ है कि भारत इस मामले में जल्दबाजी में प्रतिक्रिया नहीं देना चाहता.
पीयूष गोयल ने क्या कहा?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार ने अमेरिकी अदालत के फैसले पर ध्यान दिया है. उन्होंने बताया कि अमेरिका में इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस भी हुई है और कुछ प्रशासनिक निर्णय लिए गए हैं. भारत इन सभी पहलुओं का अध्ययन कर रहा है.
क्या बोले प्रह्लाद जोशी?
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी कहा कि इस मामले को वाणिज्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय मिलकर देख रहे हैं. विदेश मंत्री एस जयशंकर भी इस पर नजर बनाए हुए हैं. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर ही कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी जाएगी.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का गलत इस्तेमाल किया. अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है, यह शक्ति अमेरिकी कांग्रेस को प्राप्त है.इस फैसले में चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स समेत अन्य न्यायाधीश शामिल थे.
ट्रंप ने की इस फैसले की आलोचना
हालांकि ट्रंप ने इस निर्णय की आलोचना करते हुए इसे गलत बताया और 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत 10 प्रतिशत अस्थायी वैश्विक टैरिफ लगाने की घोषणा की है. अब पूरी दुनिया की नजर अमेरिका की आगे की नीति और उसके वैश्विक व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव पर टिकी है.
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