कांग्रेस के इस दिग्गज नेता का निधन, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने जताया दुख

K.P. Unnikrishnan Passed Away: पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केपी उन्नीकृष्णन का आज सुबह निधन हो गया. उन्होंने केरल के कोझिकोड में एक अस्पताल में अंतिम सांस ली. वह लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे.

K.P. Unnikrishnan Passed Away: पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केपी उन्नीकृष्णन का आज सुबह निधन हो गया. उन्होंने केरल के कोझिकोड में एक अस्पताल में अंतिम सांस ली. वह लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे.

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Suhel Khan
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KP Unnikrishnan Passed Away

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केपी उन्नीकृष्णन का निधन Photograph: (PTI)

K.P. Unnikrishnan Passed Away: पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केपी उन्नीकृष्णन का मंगलवार (3 मार्च, 2026) तड़के निधन हो गया. उन्होंने 89 वर्ष की आयु में कोझिकोड के एक अस्पताल में आखिरी सांस ली. उन्नीकृष्णन पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बिमारियों से जूझ रहे थे जिसके चलते उन्हें कोझिकोड के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनके परिवार में उनकी पत्नी अमृता और दो बेटियां हैं.

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एक ही सीट से पांच बार जीते लोकसभा चुनाव

उन्नीकृष्णन को केरल के राजनीतिक इतिहास में सबसे लंबे समय तक एक ही लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का अनूठा गौरव प्राप्त है. वे 1971 से 1996 तक कोझिकोड के वडाकारा से सांसद रहे और इस दौरान उन्होंने तीन अलग-अलग राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व भी किया. वे पहली बार 1971 में कांग्रेस के टिकट पर संसद के उच्च सदन में पहुंचे. उन्नीकृष्णन ने 1977, 1980, 1984, 1989 और 1991 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की. हालांकि, 1977 के बाद वे कांग्रेस (यू) और कांग्रेस (एस) के सदस्य रहे. लेकिन 1995 में वे फिर से कांग्रेस में आ गए. हालांकि 1996 के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के ओ. भरथन ने मात दी.

दो बार केंद्र में संभाली अहम जिम्मेदारी

उन्नीकृष्णन ने 1989 से 1990 तक वी.पी. सिंह मंत्रिमंडल में दूरसंचार, जहाजरानी और भूतल परिवहन मंत्री के रूप में भी कार्य किया. इस दौरान, उन्होंने खाड़ी युद्ध के समय कुवैत से 1.5 लाख से अधिक भारतीयों को निकालने में अहम योगदान निभाया. इनमें अधिकतर केरल के रहने वाले लोग थे. मंत्रिमंडल की मनाही के बावजूद, वे इराक के तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के छिपने के स्थान पर गए और भारतीय लोगों की वापसी के लिए बातचीत की.

स्वतंत्रता सेनानियों परिवार में हुआ था जन्म

उन्नीकृष्णन का जन्म 20 सितंबर 1936 को कोझिकोड के कोइलांडी में स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार में हुआ था. वे कम उम्र से ही राजनीति में सक्रिय हो गए थे. उन्नीकृष्णन कांग्रेस में समाजवादी विचारधारा के समर्थक थे और इंदिरा गांधी के शुरुआती शासनकाल में उनके प्रबल समर्थक थे. हालांकि, आपातकाल के बाद और संजय गांधी से मतभेद होने के कारण उन्होंने इंदिरा गांधी से नाता तोड़ लिया था.

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