अविश्वास प्रस्ताव के बाद ओम बिरला का बड़ा फैसला, प्रस्ताव पर निर्णय तक स्पीकर की कुर्सी से दूर रहने का किया ऐलान

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव ने संसद की राजनीति को गरमा दिया है. प्रस्ताव पर फैसला होने तक स्पीकर के कुर्सी से दूर रहने के निर्णय ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया.

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव ने संसद की राजनीति को गरमा दिया है. प्रस्ताव पर फैसला होने तक स्पीकर के कुर्सी से दूर रहने के निर्णय ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया.

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Deepak Kumar
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Om Birla

लोकसभा में विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के बाद स्पीकर ओम बिरला ने एक अहम और असामान्य फैसला लिया है. उन्होंने कहा है कि जब तक उनके खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर सदन में निर्णय नहीं हो जाता, तब तक वे स्पीकर की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे. बता दें कि नियमों के तहत ऐसा करना जरूरी नहीं है, फिर भी उन्होंने निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सदन की कार्यवाही से दूर रहने का निर्णय लिया है. बताया जा रहा है कि सरकार और विपक्ष दोनों की ओर से उन्हें मनाने की कोशिश हो सकती है, लेकिन फिलहाल वे अपने फैसले पर कायम हैं.

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इस दिन हो सकती है प्रस्ताव पर चर्चा

संभावना जताई जा रही है कि बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन, यानी 9 मार्च को इस प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है. संसदीय नियमों के अनुसार, प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी होगा. इसके बाद सदन में इस पर औपचारिक चर्चा कराई जा सकती है.

सूत्रों के मुताबिक, स्पीकर बिरला ने लोकसभा के महासचिव को निर्देश दिया है कि उनके खिलाफ दिए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस की जांच की जाए और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाए.

गौरव गोगोई ने दी ये जानकारी

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने जानकारी दी कि पार्टी ने नियम 94C के तहत स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है. सूत्रों का कहना है कि इस नोटिस पर कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं.

विपक्ष ने लगाए पक्षपात के आरोप

विपक्षी दलों ने स्पीकर पर सदन की कार्यवाही में पक्षपात करने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि कई मौकों पर विपक्षी नेताओं को बोलने का मौका नहीं दिया गया. विपक्ष ने कुछ सांसदों के निलंबन, विवादित बयानों और सदन की कार्यवाही के दौरान हुए घटनाक्रम को भी अपने आरोपों का आधार बनाया है. इस पूरे घटनाक्रम से संसद का माहौल गरमाया हुआ है.

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