लोकसभा स्पीकर के खिलाफ पेश हुआ अविश्वास प्रस्ताव, 190 सांसदों में राहुल गांधी का नाम नहीं, TMC ने भी बनाई दूरी

संसद के भीतर टकराव एक नए स्तर पर पहुंच गया है. विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए उन्हें पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंप दिया है

संसद के भीतर टकराव एक नए स्तर पर पहुंच गया है. विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए उन्हें पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंप दिया है

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Dheeraj Sharma
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Lok Sabha Speaker Om Birla

संसद के भीतर टकराव एक नए स्तर पर पहुंच गया है. विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए उन्हें पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंप दिया है. इस कदम ने संसद की राजनीति में हलचल तेज कर दी है और सदन की निष्पक्षता को लेकर बहस छेड़ दी है.

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120 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ नोटिस सौंपा

कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों के करीब 120 सांसदों ने लोकसभा सेक्रेटरी जनरल को यह नोटिस सौंपा है. नोटिस में स्पीकर पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्ष के साथ पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और कांग्रेस सांसदों पर झूठे आरोप लगाए. विपक्ष का कहना है कि यह संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नोटिस में कांग्रेस सांसदों में राहुल गांधी का नाम नहीं है. साथ ही टीएमसी ने भी अविश्वास प्रस्ताव से दूरी बना ली है.

सदन की कार्यवाही से अलग हुए ओम बिरला

नोटिस सौंपे जाने के बाद एक अहम घटनाक्रम में ओम बिरला ने खुद को लोकसभा की कार्यवाही के संचालन से अलग कर लिया. मंगलवार को वे सदन की कार्यवाही के दौरान आसन पर नहीं बैठे. इसे संसदीय इतिहास में एक असाधारण स्थिति के रूप में देखा जा रहा है, जिसने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

धन्यवाद प्रस्ताव बना टकराव की वजह

बता दें कि विवाद की जड़ राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान की कार्यवाही बताई जा रही है. विपक्ष का आरोप है कि इस दौरान स्पीकर ने राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने से रोका, जिससे विपक्ष को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला. विपक्षी दलों का कहना है कि यह लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है, जहां हर पक्ष को अपनी राय रखने का अधिकार होता है.

स्पीकर की टिप्पणी पर विपक्ष की नाराज़गी

नोटिस में कहा गया है कि सदन में स्पीकर की टिप्पणी से कांग्रेस सांसदों पर स्पष्ट रूप से झूठे और भ्रामक आरोप लगे, जिससे विपक्ष की छवि को नुकसान पहुंचा. विपक्ष का तर्क है कि स्पीकर का पद संवैधानिक रूप से निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन मौजूदा हालात में यह निष्पक्षता सवालों के घेरे में है.

आगे क्या होगा?

अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपे जाने के बाद अब गेंद संसद के प्रक्रिया तंत्र के पाले में है. प्रस्ताव को स्वीकार किया जाएगा या नहीं, इस पर आगे की कार्यवाही तय होगी. वहीं सत्ता पक्ष ने फिलहाल इस मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही और राजनीतिक माहौल दोनों को प्रभावित कर सकता है.

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ लाया गया यह प्रस्ताव न सिर्फ एक संवैधानिक प्रक्रिया है, बल्कि यह संसद में सत्ता और विपक्ष के बीच बढ़ते अविश्वास का भी संकेत देता है.

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