Economic Survey: आज पेश होगा आर्थिक सर्वे, क्या आम आदमी के आएंगे अच्छे दिन?

Economic Survey बजट से पहले देश की आर्थिक सेहत का रिपोर्ट कार्ड पेश करता है. इस बार GDP ग्रोथ, महंगाई पर नियंत्रण, युवाओं के लिए रोजगार और मिडिल क्लास को टैक्स राहत पर खास नजर है. सर्वे आने वाले बजट की दिशा तय करेगा.

Economic Survey बजट से पहले देश की आर्थिक सेहत का रिपोर्ट कार्ड पेश करता है. इस बार GDP ग्रोथ, महंगाई पर नियंत्रण, युवाओं के लिए रोजगार और मिडिल क्लास को टैक्स राहत पर खास नजर है. सर्वे आने वाले बजट की दिशा तय करेगा.

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Ravi Prashant
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Economic Survey

आर्थिक सर्वे Photograph: (NN)

जिस तरह हम साल के अंत में अपने घर के खर्चों और कमाई का हिसाब-किताब लगाते हैं, ठीक वैसे ही सरकार 'आर्थिक सर्वे' के जरिए देश का हिसाब पेश करती है. बजट आने से ठीक एक-दो दिन पहले वित्त मंत्रालय यह रिपोर्ट कार्ड दिखाता है. इसमें बताया जाता है कि पिछले साल देश ने कितनी तरक्की की और आने वाले साल में कमाई और खर्च की क्या योजना रहेगी. इस बार का सर्वे इसलिए खास है क्योंकि यह तय करेगा कि आपकी जेब पर बोझ कम होगा या नहीं. मोदी सरकार गुरुवार यानी कल ये रिपोर्ट पेश करने जा रही हैं, ऐसे में सबकी नजर इसी पर टिकी हुई हैं. 

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क्या हम सबसे आगे बने रहेंगे?

देश की तरक्की को नापने का सबसे बड़ा पैमाना GDP है. आसान भाषा में कहें तो देश में जितना ज्यादा काम होगा और जितनी ज्यादा चीजें बिकेंगी, GDP उतनी ही बढ़ेगी. अनुमान है कि इस बार भारत की रफ्तार 7 से 8 प्रतिशत के बीच रह सकती है. इसका मतलब यह है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा. जब GDP बढ़ती है, तो बाजार में नया पैसा आता है और व्यापार के नए मौके खुलते हैं.

आपकी रसोई के बजट पर क्या होगा असर? 

आम आदमी के लिए सबसे बड़ी चिंता महंगाई होती है. आर्थिक सर्वे में यह देखा जाता है कि सामान की कीमतें कितनी बढ़ीं. जानकारों का कहना है कि इस बार महंगाई को 4 से 5 प्रतिशत के बीच रखने का लक्ष्य हो सकता है. हालांकि, दाल, चावल और सब्जियों की बढ़ती कीमतें अब भी एक बड़ी चुनौती हैं. सर्वे में सरकार यह बता सकती है कि खेती की पैदावार बढ़ाकर और सामान को एक शहर से दूसरे शहर तक जल्दी पहुंचाकर कीमतों को कैसे कम रखा जाए.

युवाओं के लिए क्या है खास

भारत दुनिया का सबसे युवा देश है, इसलिए रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा है. इस बार सरकार का ध्यान सिर्फ तरक्की पर नहीं, बल्कि 'नौकरी देने वाली तरक्की' पर है. सर्वे में इस बात का रोडमैप मिल सकता है कि नई टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स के जरिए छोटे शहरों में नौकरियां कैसे पैदा की जाएं. इसके अलावा, युवाओं को नई स्किल्स सिखाने पर भी जोर दिया जा सकता है ताकि वे आज की जरूरतों के हिसाब से काम पा सकें.

विकास के असली पहिये

देश की तरक्की के लिए खेती और छोटे उद्योगों (MSME) का मजबूत होना जरूरी है. सर्वे में इन क्षेत्रों को ज्यादा मदद देने की बात कही जा सकती है. जैसे- किसानों की कमाई कैसे बढ़े और छोटे दुकानदारों या फैक्ट्री मालिकों को सस्ता कर्ज कैसे मिले. साथ ही, देश में सड़कें, रेलवे और फैक्ट्री बनाने के बड़े प्रोजेक्ट्स (मेक इन इंडिया) को और गति देने की तैयारी है, जिससे देश का बुनियादी ढांचा मजबूत हो सके.

तरक्की की राह में कौन सी बाधाएं हैं

भारत अपनी कोशिशें तो कर रहा है, लेकिन दुनिया में जो चल रहा है उसका असर भी हम पर पड़ता है. सर्वे में बताया जाएगा कि डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति क्या है और विदेशों की व्यापार नीतियां भारत को कैसे प्रभावित कर रही हैं. इसके अलावा, मौसम में बदलाव यानी क्लाइमेट चेंज भी खेती और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा है, जिससे निपटने की रणनीति पर चर्चा हो सकती है.

क्या टैक्स में मिलेगी राहत?

मिडिल क्लास हमेशा यह देखता है कि उसे इनकम टैक्स में कितनी छूट मिलेगी. आर्थिक सर्वे सीधे तौर पर टैक्स नहीं घटाता, लेकिन यह इशारा जरूर कर देता है कि सरकार का रुख क्या है. अगर सर्वे में स्वास्थ्य, शिक्षा और आम आदमी की बचत पर सकारात्मक बातें होती हैं, तो समझिए कि कल आने वाले बजट में टैक्स छूट या राहत की बड़ी घोषणा हो सकती है.

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