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आवारा कुत्तों के मामले पर SC की अहम टिप्पणी Photograph: (Social Media)
Supreme Court on Stray Dog: सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले पर बुधवार को सुनवाई हुई. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर अहम टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुत्ते के काटने के मूड को पढ़ा नहीं जा सकता है. शीर्ष अदालत ने कहा कि सड़कें कुत्तों से मुक्त और साफ होनी चाहिए, वे भले ही न काटें बावजूद इसके वे दुर्घटना की वजह बन सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, हमें सड़कों, स्कूलों और संस्थानों में कुत्तों की क्या जरूरत है?
तीन जजों की पीठ ने की मामले पर सुनवाई
दरअसल, बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में कई अंतरिम आवेदनों पर सुनवाई शुरू की. तीन जजों की पीठ ने राजमार्गों पर इन जानवरों की मौजूदगी को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताईं. न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारी की पीठ ने कहा कि कोई भी जानवर के मन की बात नहीं जान सकता कि वह कब काटने के मूड में है या नहीं. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि, "इलाज से बेहतर रोकथाम है."
याचिकाकर्ताओं के वकील सिब्बल ने क्या दी दलील?
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि यदि कोई कुत्ता अनियंत्रित है और किसी को काट सकता है, तो लोग एक केंद्र को सूचित कर सकते हैं जहां कुत्ते को ले जाकर उसकी नसबंदी कराई जा सकती है और उसे वापस इलाके में छोड़ा जा सकता है. इस पर न्यायालय ने कहा, "केवल एक ही कमी है, वह है कुत्तों को परामर्श देना ताकि उन्हें वापस छोड़े जाने पर वे न काटें."
सड़क पर दुर्घटना का कारण भी बनते हैं कुत्ते- SC
शीर्ष अदालत ने कहा कि, "यह सिर्फ इतना ही नहीं है कि कुत्ता काट ले और किसी का पीछा करे, बल्कि इससे दुर्घटना भी हो सकती है. उनका सड़क पर दौड़ना भी एक समस्या है, ऐसी सड़कें जहां वाहन चल रहे होते हैं, यह सिर्फ काटना नहीं है."
सिब्बल ने जवाब दिया कि, "लेकिन कुत्ते सड़कों पर नहीं, घरों के अंदर होते हैं."
इस पर पीठ ने कहा कि, "आपकी जानकारी पुरानी लगती है, रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होती है. सड़कों को कुत्तों से मुक्त और साफ रखना होगा. वे शायद न काटें, लेकिन फिर भी दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं."
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SC ने दिया था आवारा कुत्तों को आश्रय स्थलों में भेजने का आदेश
बता दें कि कुत्ते के काटने की बढ़ती घटनाओं के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 7 नवंबर को शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, बस स्टैंडों, खेल परिसरों और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था. साथ ही निर्देश दिया था कि कुत्तों को निर्धारित आश्रय स्थलों में भेजा जाए. शीर्ष अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं की निगरानी कर रही पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कुत्तों को सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों के परिसर में प्रवेश करने से रोका जाए. इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा था कि उन्हें उसी स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाना चाहिए, जहां से उन्हें पकड़ा गया था.
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