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जमीन के बदले नौकरी घोटाले के केस में राउज एवेन्यू कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई. इस दौरान RJD प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव समेत 41 पर आरोप तय किए गए हैं. वहीं 52 को बरी कर दिया गया है. रेल मंत्रालय में चतुर्थ श्रेणी में नौकरी पाने के बदले में भूमि लेने के घोटाले मामले में राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल कोर्ट ने लालू यादव और अन्य के खिलाफ आरोप तय करके के आदेश दिए हैं.
बरी करने की दलील सही नहीं
अदालत ने संदेह के आधार पर पाया कि लालू यादव और परिवार की ओर से बड़ी साजिश रचि गई थी. चार्जशीट में लालू यादव के करीबी सहयोगियों को नौकरियों के बदले जमीन अधिग्रहण में सह-साजिशकर्ता के रूप में सहायत मिली. अदालत ने कहा कि लालू यादव और उनके परिवार को बरी करने की दलील सही नहीं है. इस बात के पुख्ता संकेत सामने आए हैं कि लालू यादव और उनके परिवार के सदस्य सरकारी पद से अगल होकर आपराधिक उद्यम के रूप में इस काम को कर रहे थे.
52 आरोपी को किया बरी
अदालत का कहना है कि इस केस में सरकारी संवैधानिक अधिकारों और विवेक का दुरुपयोग हुआ है. अदालत ने 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए. भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(1)(डी) के साथ 13(2) के तहत मुकदमा चलेगा. इस केस में अदालत ने 52 आरोपियों को बरी करने का आदेश सुनाया. चार्जशीट के तहत इनके खिलाफ पुख्ता सबूत सामने नहीं आए हैं.
103 आरोपियों में पांच लोगों की मौत
19 दिसंबर को सुनवाई के दौरान CBI ने अदालत में आरोपियों के हालात के बारे में एक वेरिफिकेशन रिपोर्ट सौंपी थी. इसमें कहा गया था कि चार्जशीट में नामजद 103 आरोपियों में पांच लोगों की मौत हो चुकी है. CBI ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है.
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