/newsnation/media/media_files/2026/01/09/shashi-tharoor-file-2026-01-09-08-03-10.jpg)
Shashi Tharoor: (ANI)
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है लेकिन देश की सभी समस्याओं के लिए उन्हें जिम्मेदार मानना गलत है, ये कहना है कांग्रेस सांसद शशि थरूर का. उन्होंने कहा कि वे नेहरू को भारत के लोकतंत्र का संस्थापक मानते हैं लेकिन उनकी प्रशंसा आलोचन से परे नहीं है. केरल विधानसभा इंटरनेशनल बुक फेस्टिवल को संबोधित करते हुए थरूर ने नेहरू को लेकर बात की.
गुरुवार को फेस्टिवल को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मैं जवाहरलाल नेहरू का प्रशंसक हूं लेकिन बिना आलोचना वाला प्रशंसक नहीं हूं. मैं उनकी सोच और उनके दिमाग की तारीफ करता हूं. मैं उनका बहुत ज्यादा सम्मान करता हूं. बावजूद इसके मैं उनके सभी विचारों और नीतियों का 100 प्रतिशत समर्थन नहीं कर सकता हूं. उन्होंने ऐसे कई काम किए हैं, जिसके लिए वे अधिक तारीफ के हकदार हैं. सबसे अहम बात ये है कि भारत मे लोकतंत्र को मजबूती से नेहरू ने ही स्थापित किया था. नेहरू को आसान बलि का बकरा बना दिया गया है.
थरूर ने कहा कि कुछ मामलों में नेहरू की आलोचना की जा सकती है, जैसे- चीन के खिलाफ 1962 का युद्ध हम कुछ हद तक नेहरू के फैसलों के वजह से हारे हैं.
थरूर की पढ़ने में रुचि ऐसे जागी
उन्होंने कहा कि मुझे अस्थमा था, जिस वजह से मुझे पढ़ने का शौक हुआ क्योंकि उस जमाने में टीवी या मोबाइल नहीं थे, जिस वजह से किताबें ही मेरी साथी बन गई. मैंने अपना पहला उपन्यास भी बहुत ही कम उम्र में ही लिख दिया था लेकिन उस पर स्याही फैल गई, जिस वजह से वह खो गया. श्री नारायण गुरु की जीवनी उनकी 28वीं किताब है.
जिन्हें किताबें पढ़ने का समय नहीं, वे क्या करें?
थरूर ने कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में पढ़ने की संस्कृति खत्म हो रही है लेकिन पढ़ने की संस्कृति में केरल आगे है. मैंने द ग्रेट इंडियन नॉवेल साल 1989 में एक व्यंग्यात्म कृति के रूप लिखा, वह भी सिर्फ इसलिए कि उस वक्त तक भारत में ये शैली बहुत कम ही थी. जिन लोगों को किताब पढ़ना मुश्किल लगता है कि उनके लिए थरूर ने कहा कि कम पन्नों वाली छोटी किताबें ज्यादा प्रभावी हो सकती हैं.
/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
Follow Us