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Shambhavi Pathak
Ajit Pawar Plane Crash: अजित पवार के प्राइवेट चार्टर विमान Learjet 45 के हादसे में देश ने सिर्फ एक वरिष्ठ नेता ही नहीं, बल्कि भारतीय कॉर्पोरेट एविएशन के दो प्रशिक्षित पायलट भी खो दिए. इस दर्दनाक हादसे में 25 वर्षीय को-पायलट शांभवी पाठक और पायलट-इन-कमांड सुमित कपूर की जान चली गई. दोनों की उम्र, अनुभव और करियर की राह अलग थी, लेकिन आखिरी उड़ान एक ही साबित हुई.
बचपन से ही रगों में था साहस
शांभवी पाठक भारतीय एविएशन इंडस्ट्री में उभरता हुआ युवा चेहरा थीं. उनकी रगों में अनुशासन और साहस बचपन से ही था. उनके पिता एक आर्मी ऑफिसर हैं, जिन्होंने अपनी बेटी को हमेशा निडरता के साथ आसमान छूने की सीख दी. शांभवी का ननिहाल उत्तर प्रदेश के कानपुर में है, जबकि उनका परिवार दिल्ली में बस गया था. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई ग्वालियर और दिल्ली के 'एयर फोर्स बाल भारती स्कूल' से की. यहीं से उन्होंने हवाई जहाजों को देखकर अपने करियर की दिशा तय कर ली थी.
न्यूजीलैंड से मुंबई तक का सफर
शांभवी ने मुंबई यूनिवर्सिटी से एयरोनॉटिक्स/एविएशन की पढ़ाई की और फिर न्यूजीलैंड से कमर्शियल पायलट ट्रेनिंग ली. उनके पास कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) के साथ फ्लाइट इंस्ट्रक्टर रेटिंग भी थी. करियर की शुरुआत में वह मध्य प्रदेश फ्लाइंग क्लब से जुड़ीं और बाद में VSR एविएशन में बतौर 'फर्स्ट ऑफिसर' शामिल हुईं और Learjet जैसे बिजनेस जेट उड़ाने लगीं. बता दें कि यह कोई मामूली बात नहीं है, ऐसे विमानों को अक्सर वीआईपी मूवमेंट के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जहां पायलट की कुशलता पर बड़ी शख्सियतों की सुरक्षा टिकी होती है.
इसके बाद अगस्त 2022 से वह कॉर्पोरेट चार्टर ऑपरेशंस का हिस्सा रहीं. एविएशन से जुड़े लोगों के मुताबिक, उनका करियर अभी शुरुआती दौर में था. उन्हें लगभग 1,500 घंटे की उड़ान का अनुभव था.
सपनों का असमय अंत
महज 25 साल की उम्र में शांभवी ने वह मुकाम हासिल कर लिया था, जिसे पाने में लोगों को दशकों लग जाते हैं. वह अविवाहित थीं और अपनी पूरी जिंदगी देश की सेवा और विमानन क्षेत्र को समर्पित कर देना चाहती थीं. उनके सहयोगियों के अनुसार, वह तकनीकी रूप से बहुत ही शांत और सुलझी हुई पायलट थीं.
जांच का है इंतजार
यह हादसा सिर्फ एक विमान दुर्घटना नहीं है. इसने चार्टर एविएशन की सुरक्षा व्यवस्था, पायलट ड्यूटी शेड्यूल और सेफ्टी ऑडिट सिस्टम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. अब एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह हादसा तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी सिस्टमेटिक लापरवाही का नतीजा था.
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