Assam Elections 2026: होली के बाद हो सकती है असम विधानसभा चुनाव की घोषणा, जानें NDA और INDIA गठबंधन में कौन भारी?

Assam Elections 2026: पूर्वोत्तर राज्य असम में चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई हैं. माना जा रहा है कि चुनाव आयोग होली के त्योहार के बाद चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है.

Assam Elections 2026: पूर्वोत्तर राज्य असम में चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई हैं. माना जा रहा है कि चुनाव आयोग होली के त्योहार के बाद चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है.

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Dheeraj Sharma
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Assam Elections 2026

Assam Elections 2026: असम की 126 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 30 मई को समाप्त हो रहा है और इसके साथ ही राज्य में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. सूत्रों के मुताबिक, होली के बाद चार से आठ मार्च के बीच चुनाव आयोग विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर सकता है. परंपरा के अनुसार, चुनाव कार्यक्रम घोषित होने और मतदान के दिन के बीच कम से कम 25 दिनों का अंतर रखा जाता है. ऐसे में मार्च के पहले सप्ताह में आदर्श चुनाव संहिता लागू होने की संभावना है, जबकि मतदान अप्रैल के पहले हफ्ते तीन से सात अप्रैल के बीच हो सकता है. माना जा रहा है कि राज्य में चुनाव एक ही चरण में कराए जाने की तैयारी है.

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नेतृत्व पर स्पष्टता, सरमा ही चेहरा

सत्ताधारी एनडीए खास तौर पर बीजेपी ने तीसरी बार सत्ता में वापसी के लक्ष्य के साथ रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि चुनाव मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर स्टार प्रचारक की भूमिका निभाएंगे.  सूत्रों को मुताबिक असम बीजेपी ने उनसे आठ से दस रैलियों के लिए समय मांगा है, जिससे चुनाव प्रचार को राष्ट्रीय स्तर पर धार मिल सके. 

टिकट वितरण और एंटी-इंकंबेंसी की कसौटी

लगातार दस साल की सत्ता के बाद एंटी-इंकंबेंसी एक अहम मुद्दा बन सकता है. सूत्रों की मानें तो जिन विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर असंतोष की रिपोर्ट मिलेगी, उनके टिकट काटे जा सकते हैं. संकेत हैं कि पार्टी 25 से 30 नए चेहरों को मौका दे सकती है.

यह कदम संगठन में नई ऊर्जा लाने और मतदाताओं के बीच सकारात्मक संदेश देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

चुनावी मुद्दों की दोहरी रणनीति

बीजेपी ने चुनावी मुद्दों को दो श्रेणियों में बांटा है. पहली श्रेणी में बड़े और व्यापक मुद्दे शामिल हैं जैसे अवैध घुसपैठ, विकास योजनाएं, हिंदुत्व, महिलाओं का सशक्तिकरण और केंद्र-राज्य की कल्याणकारी योजनाएं.

वहीं दूसरी ओर, माइक्रो-लेवल रणनीति के तहत गांव, ब्लॉक और जिला स्तर के करीब 100 स्थानीय मुद्दों की पहचान कर उनके समाधान पर जोर दिया गया है. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, चाय बागान मजदूर, सरकारी कर्मचारी और छात्र समुदाय से जुड़े मुद्दों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है.

एनडीए का भरोसा

पिछले चुनाव में बीजेपी-नीत गठबंधन ने 126 में से 75 सीटें जीती थीं. इस बार एनडीए को 90 से 100 सीटों की उम्मीद जताई जा रही है. 

क्या है इंडिया गठबंधन की स्थिति

कांग्रेस ने 2021 के बाद एआईयूडीएफ और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के साथ गठबंधन तोड़ दिया, जिससे विपक्षी समीकरण कमजोर पड़े हैं. कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व में आंतरिक मतभेद और नेताओं के पलायन की खबरें भी सामने आई हैं. ऐसे में सत्ताधारी गठबंधन यानी NDA को बढ़त मिलती दिख रही है. 

कल्याणकारी योजनाओं का असर

राज्य सरकार की समाज कल्याण योजनाओं छात्रों को भत्ता, गरीबों को कैश ट्रांसफर, चाय बागान मजदूरों को आर्थिक सहायता और ‘मिशन वसुंधरा’ के तहत जमीन का मालिकाना हक ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में मजबूत पकड़ बनाई है.

घुसपैठ के खिलाफ अभियान और बुनियादी ढांचे के विकास ने भी बीजेपी को चुनावी बढ़त दिलाने में भूमिका निभाई है. अब निगाहें चुनाव तारीखों की औपचारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिसके बाद असम की राजनीति पूरी तरह चुनावी रंग में रंग जाएगी.

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