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एयर इंडिया (ani)
जून 2025 में हुए दुखद विमान हादसे के बाद, एयर इंडिया ने अब मुआवजे की प्रक्रिया को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाया है. एयरलाइन ने एक परिवार को चिट्ठी भेजकर बताया है कि कानूनी नियमों के हिसाब से उनका मुआवजा पहले दिए गए ₹25 लाख से भी कम बनता है, फिर भी कंपनी अपनी तरफ से ₹10 लाख और देने को तैयार है.
मुआवजे का गणित: क्या है ऑफर?
कंपनी अब तक प्रभावित परिवारों को 25 लाख की अंतरिम (शुरुआती) मदद दे चुकी है. अब एयरलाइन ने 10 लाख की अतिरिक्त मदद की पेशकश की है, जिसे 'फुल एंड फाइनल' सेटलमेंट कहा जा रहा है. इस तरह एक परिवार को कुल 35 लाख के करीब मिल सकते हैं. साथ ही, मेमोरियल वेलफेयर ट्रस्ट से 1 करोड़ की मदद की प्रक्रिया भी अलग से चल रही है.
'रिलीज और डिस्चार्ज' (RDI) फॉर्म का पेच
अगर कोई परिवार यह 10 लाख का ऑफर स्वीकार करता है, तो उन्हें एक खास फॉर्म (RDI) पर साइन करना होगा. इसके कुछ कड़े नियम हैं. साइन करने के बाद आप एयर इंडिया पर भविष्य में कोई भी केस नहीं कर पाएंगे. आप सिर्फ एयरलाइन ही नहीं, बल्कि बोइंग (विमान बनाने वाली कंपनी), भारत सरकार, DGCA और इंजन बनाने वाली कंपनियों पर भी कोई दावा नहीं कर पाएंगे. अगर भविष्य में हादसे से जुड़ा कोई नया सच सामने आता है, तब भी यह समझौता नहीं बदलेगा.
एयरलाइन का क्या कहना है?
एयर इंडिया का कहना है कि उन्होंने 'कैरिज बाई एयर एक्ट, 1972' और सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों को आधार बनाकर यह हिसाब लगाया है. कंपनी के मुताबिक, वे चाहते हैं कि परिवारों को बार-बार कानूनी चक्कर न काटने पड़ें और मामला सम्मानजनक तरीके से बंद (Closure) हो सके.
बता दें कि 12 जून 2025 को एयर इंडिया का विमान लंदन जाते समय क्रैश हो गया था, जिसमें 260 लोगों की जान गई थी. जांच की शुरुआती रिपोर्ट में पता चला था कि उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद इंजन को ईंधन मिलना बंद हो गया था, जिससे विमान ने अपनी शक्ति खो दी थी.
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