सावधान! वनों की कटाई से बढ़ा महामारी का खतरा, जंगली मच्छर फैला सकते हैं खतरनाक रोग

ब्राजील के अटलांटिक फॉरेस्ट में वनों की कटाई से मच्छरों का व्यवहार बदल रहा है. नए अध्ययन के अनुसार मच्छर अब जानवरों के बजाय इंसानों से अधिक खून ले रहे हैं. इससे डेंगू, पीत ज्वर और अन्य मच्छर जनित रोगों के फैलने का खतरा बढ़ सकता है.

ब्राजील के अटलांटिक फॉरेस्ट में वनों की कटाई से मच्छरों का व्यवहार बदल रहा है. नए अध्ययन के अनुसार मच्छर अब जानवरों के बजाय इंसानों से अधिक खून ले रहे हैं. इससे डेंगू, पीत ज्वर और अन्य मच्छर जनित रोगों के फैलने का खतरा बढ़ सकता है.

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Ravi Prashant
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मच्छरों की पहली पसंद इंसानी शरीर Photograph: (FREEPIK)

ब्राजील के समुद्री तट के साथ फैला अटलांटिक फॉरेस्ट कभी पक्षियों, एंफीबियंस, रेपटाइल्स और मछलियों की सैकड़ों प्रजातियों का घर था. लेकिन मानव विकास और वनों की कटाई ने इसे इसकी मूल संरचना के लगभग एक तिहाई तक सीमित कर दिया है. जैसे जैसे इंसान पहले से सुरक्षित प्राकृतिक क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं, वहां का पारिस्थितिकी संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है.

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स्टडी क्या कहती है? 

यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल Frontiers in Ecology and Evolution में प्रकाशित हुआ है. अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और Oswaldo Cruz Institute के जीवविज्ञानी डॉ. जेरोनिमो एलेंकार के अनुसार, अटलांटिक फॉरेस्ट के अवशेष क्षेत्रों में पकड़े गए मच्छरों ने इंसानों से खून लेने की स्पष्ट प्राथमिकता दिखाई.

मच्छरों के भोजन का पता कैसे लगाया गया?

शोधकर्ताओं ने रियो डी जेनेरियो राज्य के दो संरक्षित क्षेत्रों में लाइट ट्रैप लगाए. इनमें सिटियो रेकांटो प्रेजर्वार और ग्वापियाकू नदी पारिस्थितिक रिजर्व शामिल थे. हाल ही में खून पी चुकी मादा मच्छरों को अलग कर प्रयोगशाला में उनके पेट में मौजूद रक्त से डीएनए निकाला गया. एक विशेष जीन की मदद से यह पहचाना गया कि मच्छरों ने किस प्रजाति को काटा था.

इंसान बने प्रमुख रक्त स्रोत

कुल 1,714 मच्छर 52 प्रजातियों से एकत्र किए गए. इनमें से 145 मादा मच्छरों में रक्त पाया गया. केवल 24 मामलों में रक्त स्रोत की पहचान हो सकी, जिनमें 18 इंसान थे. इसके अलावा कुछ पक्षी, एक उभयचर, एक कैनिड और एक चूहा भी शामिल था. कुछ मच्छरों में मिश्रित भोजन पाया गया, यानी उन्होंने एक से अधिक प्रजातियों को काटा था.

रोग फैलने का बढ़ता खतरा

अध्ययन के सह लेखक और Federal University of Rio de Janeiro के शोधकर्ता डॉ. सर्जियो मचाडो का कहना है कि इतने विविध पारिस्थितिक तंत्र में इंसानों को प्राथमिकता देना रोग संचरण के जोखिम को काफी बढ़ा देता है. इस क्षेत्र में मच्छर पीत ज्वर, डेंगू, जीका, मायारो और चिकनगुनिया जैसे वायरस फैला सकते हैं.

भविष्य की चेतावनी

वैज्ञानिकों का मानना है कि जैसे जैसे प्राकृतिक मेज़बान कम होते जाएंगे, मच्छर इंसानों पर और अधिक निर्भर होंगे. यह स्थिति वन किनारे रहने वाले समुदायों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. शोधकर्ताओं के अनुसार, मच्छरों की भोजन आदतों को समझना निगरानी, रोकथाम और दीर्घकालिक नियंत्रण रणनीतियों के लिए बेहद जरूरी है.

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