Sushant Singh Rajput Birth Anniversary: इस शख्स के बेहद करीब थे सुशांत सिंह राजपूत, दूर होते ही होने लगती थी एंजाइटी

Sushant Singh Rajput: सुशांत सिंह राजपूत की आज 40वीं बर्थ एनिवर्सरी है. इस मौके पर हम आपको बताते हैं कि एक्टर कि जिंदगी में एक शख्स के बेहद खास हुआ करता था. सुशांत उस इंसान के इतने करीब थे कि उससे दूर बनते ही उन्हें एंजाइटी होने लगती थी.

Sushant Singh Rajput: सुशांत सिंह राजपूत की आज 40वीं बर्थ एनिवर्सरी है. इस मौके पर हम आपको बताते हैं कि एक्टर कि जिंदगी में एक शख्स के बेहद खास हुआ करता था. सुशांत उस इंसान के इतने करीब थे कि उससे दूर बनते ही उन्हें एंजाइटी होने लगती थी.

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Khushi Samarjeet Giri
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Sushant Singh Rajput Birthday anniversary he would experience anxiety whenever Shweta Singh Kirti ap

Sushant Singh Rajput

Sushant Singh Rajput: आज सुशांत सिंह राजपूत की 40वीं बर्थ एनिवर्सरी है. एक्टर की जिंदगी में एक शख्स बेहद खास था. जिससे दूर होने पर एक्टर को एंजाइटी होने लगती थी. सुशांत को दुनिया छोड़े लगभग छह साल हो चुके हैं. लेकिन एक्टर की यादें आज भी परिवार और फैंस के दिलों में जिंदा हैं. इस मौके पर एक्टर की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो के जरिए उन्होंने उनके बचपन का एक अनोखा किस्सा फैंस के साथ शेयर किया है.

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श्वेता सिंह कीर्ति ने शेयर किया वीडियो 

सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति वीडियो में कहा कि, 'नमस्ते सभी को, भाई का बर्थडे आने वाला है, तो सोचा कि इतनी पॉपुलर डिमांड पर हमारी बचपन की एक प्यारी-सी स्टोरी आप सबके साथ शेयर करूं. मैं बहुत सोच रही थी कि कौन-सी स्टोरी सुनाऊं, क्योंकि बचपन की तो बहुत सारी यादें हैं. लेकिन फिर मुझे एक अच्छे वाली याद आ गई, जो हम दोनों की बॉन्डिंग दिखाती है. उस टाइम मैं अपर किंडरगार्टन में थी और वो प्रेप में था. हम लोग हमेशा साथ रहते थे तो साथ रहने की आदत सी हो गई थी.' 

'मुझे बहुत एंजाइटी हो रही है'

बचपन की यादें शेयर करते हुए श्वेता कहा कि, ' हमारा स्कूल सेंट करेन्स था और बिल्डिंग भी सेम थी. लेकिन अपर किंडरगार्टन में आने के बाद मेरी क्लास दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट हो गई थी, जबकि वो अभी भी उसी पुरानी बिल्डिंग में था. एक दिन लंच टाइम पर क्या हुआ इसने अपनी बिल्डिंग से निकलकर, दरबान  से बचते-बचाते, लगभग आधा किलोमीटर दूर मेरी बिल्डिंग तक पहुंच गया और सीधा मेरी क्लास में आकर बैठ गया. आकर बोलता है-'देखो मुझे बहुत एंजाइटी हो रही है, बहुत दर लग रहा है. तुमसे मिलने का मन कर रहा था. क्या मैं तुम्हारे साथ यहां बैठ सकता हूं.' मैंने भी क्या किया अपने दोस्त और अपने बीच मैं उसे सैंडविच की तरह बैठा लिया और छुपा दिया.

'जन्मदिन मुबारक हो, मेरे हमेशा छोटे भाई'

लेकिन जब क्लास टीचर अटेंडेंस ले रही थीं, तो उन्होंने पता नहीं कैसे भाई को देख लिया. मैं एक बहुत प्रोटेक्टिव बड़ी बहन बन गई और बोली- 'मैम, इसे अच्छा फील नहीं हो रहा है, क्या ये थोड़ी देर हमारे साथ रह  सकता है?' और सच में, टीचर मान गईं लगभग दो पीरियड तक वो हमारे साथ ही रहा. इतने मैं उसकी सारी एंजाइटी और सेपरेशन वाली फीलिंग चली गई और फिर वो खुशी-खुशी अपनी क्लास में वापस चला गया. ये छोटी-सी स्टोरी बस यही दिखाती है कि हम दोनों कितने क्लोज थे. हम लोगों को एक-दूसरे से अलग रहना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था और शायद आज भी नहीं लगता. जन्मदिन मुबारक हो, मेरे हमेशा छोटे भाई.'

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