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Poonam Pandey statement after meeting Premanand Maharaj in Vrindavan
Poonam Pandey meeting with Premanand Maharaj: मशहूर मॉडल और अभिनेत्री पूनम अपने बोल्ड अंदाज के लिए पहचानी जाती हैं. लेकिन हाल ही में उनका एक नया अवतार भी देखने को मिला है. उन्होंने अध्यात्म की नगरी वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के आश्रम में सत्संग में हिस्सा लिया. इस दौरान उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वह रोती हुई नजर आ रही हैं. इसके अलावा पूनम ने भक्ति, आंतरिक परिवर्तन और शांति पर आधारित अपनी आध्यात्मिक यात्रा के प्रभाव पर भी बात की.
मां के साथ सत्संग देखने आती हैं पूनम
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें संत प्रेमानंद महाराज प्रवचन दे रहे हैं. पूनम बाकी भक्तों के साथ सूट पहने हुए नीचे बैठीं हुई नजर आ रही हैं, उनके सिर पर दुपट्टा भी है. सत्संग के दौरान वह भावुक हो जाती हैं और दुपट्टे से आंसू पोंछती हुई नजर आती हैं. प्रेमानंद महाराज की शिक्षा और उनसे जुड़े हुए विचारों के बारे में बात करते हुए पूनम ने कहा कि वह हमेशा अपनी मां के साथ सत्संग देखने आती हैं. उन्होंने कहा,
“मैं हमेशा अपनी मां के साथ प्रेमानंद महाराज जी का सत्संग देखती आई हूं. उनके वचन सुनने से हमारे घर में शांति और स्पष्टता का भाव आता है. लेकिन वृंदावन में उनसे मिलना सचमुच किसी दिव्य अनुभव में प्रवेश करने जैसा था.”
सभा में पूनम ने पूछा था सवाल
प्रेमानंद महाराज के सत्संग के दौरान पूनम पांडे का प्रश्न भी लिया गया. हालांकि स्वास्थ कारणों एक चलते वह उनके सवाल का जवाब नहीं दे सके. लेकिन पूनम के लिए यह अनुभव अपने आप में पूर्ण रहा. महाराज से मुलाकात के बारे में बात करते हुए पूनम ने कहा,
“उनकी सभा के दौरान मेरा एक प्रश्न चुना गया था. हालांकि, स्वास्थ्य कारणों से वे उत्तर नहीं दे सके.लेकिन मुझे निराशा नहीं हुई. उनके शब्दों में स्वीकृति और आस्था की भावना झलकती थी, जो मौखिक उत्तरों की आवश्यकता से परे थी.
"महाराज की वाणी में भगवान का संदेश" - पूनम पांडे
पूनम पांडे ने कहा कि जब प्रेमानंद महाराज बोलते हैं तो ऐसा लगता है मानो भगवान अपना संदेश दे रहे हो. पूनम ने कहा,
"जब महाराज जी बोलते हैं, तो ऐसा लगता है मानो भगवान ने किसी खास आवाज को संदेश देने के लिए चुना हो. उनकी आवाज में एक विशेष पवित्रता और समर्पण है जो आपके भीतर एक गहरे आत्मिक स्पर्श को छू जाता है. आप उन्हें सिर्फ सुनते नहीं, बल्कि महसूस करते हैं. वृंदावन में एक ऐसी ऊर्जा है जिसे अनदेखा करना असंभव है. वहां आप लोगों को ‘नमस्ते’ कहकर अभिवादन नहीं करते. आप ‘राधे राधे’ कहते हैं, और उसका एक अलग ही प्रभाव होता है. वातावरण पवित्र प्रतीत होता है, और समय धीमा पड़ जाता है."
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