रिलीज से पहले बैन हुई थी आमिर खान की ‘रंग दे बसंती’ डायरेक्टर ने सुनाया पूरा किस्सा

Rang De Basanti 20 Years: आइकॉनिक फिल्म ‘रंग दे बसंती’ को भारतीय सिनेमा की सबसे बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है. वहीं हाल ही में फिल्म के 20 साल पूरे होने पर डायरेक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने ‘रंग दे बसंती’ की रिलीज के दौरान आई चुनौतियों पर खुलकर बात की.

Rang De Basanti 20 Years: आइकॉनिक फिल्म ‘रंग दे बसंती’ को भारतीय सिनेमा की सबसे बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है. वहीं हाल ही में फिल्म के 20 साल पूरे होने पर डायरेक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने ‘रंग दे बसंती’ की रिलीज के दौरान आई चुनौतियों पर खुलकर बात की.

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Uma Sharma
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Rang De Basanti 20 Years: आमिर खान की आइकॉनिक फिल्म ‘रंग दे बसंती’ को आज भारतीय सिनेमा की सबसे बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है. ऑस्कर्स में ऑफिशियल एंट्री, बाफ्टा अवॉर्ड्स में नॉमिनेशन और नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी इतिहास रचा था. हालांकि, इतनी बड़ी कामयाबी के बावजूद बहुत कम लोग जानते हैं कि रिलीज से पहले इस ब्लॉकबस्टर फिल्म को बैन का सामना करना पड़ा था.

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दिल को छू लेने वाली है फिल्म की कहानी

‘रंग दे बसंती’ में आमिर खान, सिद्धार्थ, अतुल कुलकर्णी, शरमन जोशी, कुनाल कपूर, आर माधवन और ब्रिटिश एक्ट्रेस एलिस पैटन, वहीदा रहमान और सोहा अली खान अहम भूमिकाओं में नजर आए थे. फिल्म की कहानी पांच कॉलेज दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पांच स्वतंत्रता सेनानियों पर बन रही एक डॉक्युमेंट्री का हिस्सा बनते हैं. स्वतंत्रता संग्राम की कहानियां इन युवाओं को इस कदर प्रभावित करती हैं कि वो मौजूदा व्यवस्था और सरकार की खामियों के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला करते हैं. यही वजह है कि फिल्म ने युवाओं के बीच जबरदस्त प्रभाव छोड़ा.

रिलीज से पहले बैन की मार झेल चुकी है फिल्म

हाल ही में फिल्म के 20 साल पूरे होने पर डायरेक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने ‘रंग दे बसंती’ की रिलीज के दौरान आई चुनौतियों पर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि फिल्म को पहले बैन कर दिया गया था. राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने कहा, “रंग दे बसंती को भी बैन कर दिया गया था. हमने इसका डटकर मुकाबला किया और आखिरकार सरकार ने फिल्म का मकसद समझा. उस समय के रक्षा मंत्री माननीय प्रणब मुखर्जी ने फिल्म देखी थी. दिल्ली के एक थिएटर में आर्मी, नेवी और एयर फोर्स के तीनों प्रमुखों ने भी फिल्म देखी थी, जो बाद में भारत के राष्ट्रपति बने. मामला उस स्तर तक पहुंच गया था.”

डरकर फिल्में बनाने वालों पर डायरेक्टर का बयान

डायरेक्टर ने आगे कहा कि कहानियां डर के साथ नहीं कही जानी चाहिए. उन्होंने कहा, “आप कहानियां यह सोचकर नहीं बताते कि उन्हें इजाजत मिलेगी या नहीं. अगर ऐसा सोचेंगे तो कहानियां कभी सामने नहीं आएंगी. अगर आप सिर्फ नतीजे के बारे में सोचेंगे और प्रोसेस पर ध्यान नहीं देंगे, तो सिनेमा का मकसद ही खत्म हो जाएगा. सोशल सिनेमा हमेशा रहा है और हमेशा रहेगा, क्योंकि वह समाज और नागरिकों से जुड़े मुद्दों को उठाता है.”

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