logo-image
लोकसभा चुनाव

Loksabha Election 2024: भाजपा की 370 सीट आने के दावे के आगे विपक्षी गठबंधन दिख रहा बेदम, जाने क्या हैं सियासी गणित 

Loksabha Election 2024: यूपी में सपा और कांग्रेस ने एक बार फिर हाथ मिलाया है. इससे पहले यह गठबंधन विधानसभा चुनाव में फेल हो चुका है. ऐसे में दोनों से चमत्कार की उम्मीद कम देखने को मिल रही है.

Updated on: 02 Mar 2024, 01:50 PM

नई दिल्ली:

Loksabha Election 2024: देश की राजनीति में उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटें बेहद अहम मानी जाती हैं. इस राज्य में जिस पार्टी ने बाजी मारी है, उसकी केंद्र में भी सरकार बनी है. भाजपा रण में उतरने से पहले राज्य में अपनी स्थिति मजबूत कर चुकी है. मोदी सरकार इस बार फिर हेट्रिक की ओर बढ़ रही है. भाजपा का दावा है कि वह इस बार वह लोकसभा चुनाव में 370 सीटें लेकर आएगी. वहीं दूसरी ओर विपक्ष की ओर से ऐसा कोई आत्मविश्वास नहीं दिखाई दे रहा है. यूपी में सपा और कांग्रेस ने एक बार फिर हाथ मिलाया है. इससे पहले यह गठबंधन विधानसभा चुनाव में फेल हो चुका है. ऐसे में दोनों से चमत्कार की उम्मीद कम देखने को मिल रही है. वहीं बसपा ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं.​ पिछला लोकसभा चुनाव उसने सपा के साथ मिलकर लड़ा था. मगर गठबंधन पीएम मोदी का रास्ता नहीं रोक पाया था. 

ये भी पढ़ें: 'बंगाल के लोगों को गरीब बनाए रखना चाहती है टीएमसी', कृष्णानगर में बोले PM मोदी

बसपा, सपा और रालोद एक साथ दिखाई दिए

2014 के लोकसभा चुनाव की बात की जाए तो उस समय भाजपा के सामने कोई गठबंधन नहीं था. मगर 2019 में भाजपा के सामने बसपा, सपा और रालोद एक साथ दिखाई दिए. 2014 में जब पीएम ने काशी से लड़ने का ऐलान किया था तो पूरे देश में जबदस्त मोदी लहर देखने को मिली थी. भाजपा गठबंधन ने यहां से रिकॉर्ड 71 सीटों पर पहुंच गया था. भाजपा के सहयोगी अपना दल एस ने भी यहां से दो सीटों पर विजय प्राप्त की थी. इस दौरान सपा को पांच, कांग्रेस को दो और बसपा शून्य पर निपट गई थी. 

2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा के गठबंधन के सामने भाजपा गठबंधन की नौ सीटें घट गई थीं. यहां से उन्हें 62 सीटें मिलीं. कांग्रेस को यहां पर शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था. अमेठी में राहुल गांधी ने अपनी सीट गंवा दी थी. कांग्रेस सिर्फ रायबरेली की सीट बचा पाई थी. यहां से सोनिया गांधी खड़ी थीं. 

बदले सियासी माहौल में चुनाव

एक बार फिर बदले सियासी माहौल में चुनाव हो रहे हैं. बसपा ने अभी तक विपक्षी खेमे को किसी तरह का कोई संकेत नहीं दिया है. वहीं रालोद अब भाजपा की तरफ चली गई है. जयंत चौधरी राजग में शामिल हो गए हैं. यहां पर देखने वाली बात है ​कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भी अखिलेश और राहुल की दो लड़ाकों वाली जोड़ी कोई कमाल नहीं कर सकी थी. इस बार सपा 63 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. वहीं कांग्रेस 17 सीटों पर खड़ी है. आजमगढ़ से अखिलेश लड़ने वाले हैं.  
 
वोट प्रतिशत की की बात की जाए तो भाजपा को 2019 में 49.46 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे. वहीं सपा को 17.96 और कांग्रेस को 6.31 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए. बसपा को 19.96 प्रतिशत वोट मिले. साल 2014 की बात की जाए तो भाजपा 41.63 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए. सपा को 22.35 और कांग्रेस को 7.53 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए. बसपा को 19.77 प्रतिशत वोट मिले.  

भाजपा को मिला बिखराव का फायदा 

कांग्रेस के प्रत्याशियों की सूची अभी तक नहीं आई है. मगर ऐसा कहा जा रहा है. कि रायबरेली से प्रियंका वाड्रा और अमेठी से राहुल गांधी चुनाव लड़ सकते हैं. बसपा के विपक्षी गठबंधन के साथ चुनाव न लड़ने से बिखराव की स्थिति बन सकती है. यहां पर एक बार फिर ​त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है.