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मंगल पांडेय की 194वीं जयंतीः वो क्रांतिकारी जिसे फांसी देने को जल्लाद भी नहीं थे तैयार

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने ट्विटर पर लिखा कि 'बर्बर अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध 1857 में क्रांति का बिगुल फूंक अपने बलिदान से राष्ट्र को जागृत करने वाले माँ भारती के अमर सपूत मंगल पांडे की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि.'

News Nation Bureau | Edited By : Karm Raj Mishra | Updated on: 19 Jul 2021, 10:19:16 AM
Mangal Pandey

Mangal Pandey (Photo Credit: News Nation)

highlights

  • यूपी के बलिया में हुआ था मंगल पांडेय का जन्म
  • अंग्रेजों के खिलाफ बैरकपुर में कर दिया था विद्रोह
  • अंग्रेजों ने डरकर 10 दिन पहले ही दे दी थी फांसी

नई दिल्ली:

देश में आजादी की लड़ाई का पहली बार शंखनाद करने वाले अमर शहीद मंगल पांडेय की 194वीं जयंती (Mangal Pandey 194th Birth Anniversary) है. आज का दिन इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए सुनहरे अक्षरों में लिख दिया गया है. इस अवसर तमाम बड़े नेताओं ने देश के महान सपूत को नमन किया. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने ट्विटर पर लिखा कि 'बर्बर अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध 1857 में क्रांति का बिगुल फूंक अपने बलिदान से राष्ट्र को जागृत करने वाले माँ भारती के अमर सपूत मंगल पांडे की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि.'

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बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शहीद मंगल पांडेय को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि 'प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की क्रांति के अग्रदूत, माँ भारती के वीर सपूत, अमर शहीद महान क्रांतिकारी #मंगलपांडे जी की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन. देश में पराधीनता के विरुद्ध संघर्ष में, आपका सर्वोच्च बलिदान युगों-युगों तक आने वाली पीढ़ियों को देश सेवा के लिए प्रेरणा देगा.'

दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने भी देश के महान सपूत को नमन किया. उन्होंने लिखा कि '1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक अमर शहीद मंगल पांडेय जी की जयंती पर उन्हें शत् शत् नमन.'

बता दें कि मंगल पांडेय का जन्म 19 जुलाई 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया में हुआ था. मंगल पांडेय का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ क्रांति की शुरुआत की थी और 29 मार्च 1857 को बैरकपुर में अंग्रेजों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था. हालांकि वह पहले ईस्ट इंडिया कंपनी में एक सैनिक के तौर पर भर्ती हुए थे लेकिन ब्रिटिश अफसरों की भारतीयों के प्रति क्रूरता को देखकर उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल लिया था.

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अंग्रेज अधिकारियों द्वारा भारतीय सैनिकों पर अत्याचार तो हो ही रहा था. लेकिन हद तब हो गई. जब भारतीय सैनिकों को ऐसी बंदूक दी गईं. जिसमें कारतूस भरने के लिए दांतों से काटकर खोलना पड़ता है. इस नई एनफील्ड बंदूक की नली में बारूद को भरकर कारतूस डालना पड़ता था. वह कारतूस जिसे दांत से काटना होता था उसके ऊपरी हिस्से पर चर्बी होती थी. उस समय भारतीय सैनिकों में अफवाह फैली थी कि कारतूस की चर्बी सुअर और गाय के मांस से बनाई गई है. ये बंदूकें 9 फरवरी 1857 को सेना को दी गईं. इस्तेमाल के दौरान जब इसे मुंह लगाने के लिए कहा गया तो मंगल पांडे ने ऐसा करने से मना कर दिया था. उसके बाद अंग्रेज अधिकारी गुस्सा हो गए. फिर 29 मार्च 1857 को उन्हें सेना से निकालने, वर्दी और बंदूक वापस लेने का फरमान सुनाया गया.

मंगल पांडे ने अंग्रेजों के खिलाफ बैरकपुर में जो बिगुल फूंका था. वह जंगल की आग की तरह फैलने लगी. विद्रोह की चिंगारी पूरे उत्तर भारत में फैल गई. इतिहासकारों का कहना है कि विद्रोह इतना तेजी से फैला था कि मंगल पांडे को फांसी 18 अप्रैल को देना था लेकिन 10 दिन पहले 8 अप्रैल को ही दे दी गई. ऐसा कहा जाता है कि बैरकपुर छावनी के सभी जल्लादों ने मंगल पांडे को फांसी देने से इनकार कर दिया था. फांसी देने के लिए बाहर जल्लाद बुलाए गए थे. 1857 की क्रांति भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम था. जिसकी शुरुआत मंगल पांडे के विद्रोह से शुरू हुआ था.

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First Published : 19 Jul 2021, 10:07:18 AM

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