भारत की जीत! US डील से ट्रेड सरप्लस 90 अरब डॉलर से ज्यादा, SBI का अनुमान

India US trade deal: वित्त वर्ष 2025 में भारत का अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस पहले से ही 40.9 अरब डॉलर था और चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से दिसंबर तक यह 26 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है.

India US trade deal: वित्त वर्ष 2025 में भारत का अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस पहले से ही 40.9 अरब डॉलर था और चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से दिसंबर तक यह 26 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है.

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Amit Kasana
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India US trade deal: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक ताजा रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते के चलते भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) अगले एक साल में 90 अरब अमेरिकी डॉलर से ऊपर पहुंच सकता है. रिपोर्ट के अनुसार इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को बड़ा मौका मिलेगा जहां प्रमुख 15 वस्तुओं के निर्यात में करीब 97 अरब डॉलर की वृद्धि की संभावना है जबकि आयात में भी नियंत्रित बढ़ोतरी होगी.

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रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 में भारत का अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस पहले से ही 40.9 अरब डॉलर था और चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से दिसंबर तक यह 26 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. समझौते के तहत अमेरिका से आयात पर टैरिफ में कटौती से भारतीय बाजार में अमेरिकी उत्पादों की पहुंच बढ़ेगी लेकिन भारतीय निर्यात की रफ्तार आयात से कहीं ज्यादा तेज होने की उम्मीद है. SBI का कहना है कि इस बदलाव से भारत की जीडीपी में लगभग 1.1 प्रतिशत का सकारात्मक असर पड़ेगा.


बादाम के दाम होंगे कम, अगले 5 सालों में ये होने जा रहा फायदा

जानकारों की मानें तो इस समझौते से भारत को कई बड़े फायदे मिलने वाले हैं. सबसे पहले विदेशी मुद्रा भंडार में बचत होगी जिससे अनुमानित रूप से 3 अरब डॉलर तक का फायदा होगा. इसके अलावा कुछ वस्तुओं जैसे बादाम (जिनमें अमेरिका का 90 प्रतिशत हिस्सा है) पर कम टैरिफ से आयात सस्ता होगा और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा. वहीं, अनुमान है कि अगले पांच सालों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान की खरीदारी से ऊर्जा, विमान पार्ट्स, कीमती धातुएं और तकनीकी उत्पादों जैसी जरूरी चीजों की आपूर्ति मजबूत होगी जो भारत की औद्योगिक विकास को गति देगी. 

महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी

बाजार के जानकारों की मानें तो अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात का 20 प्रतिशत हिस्सा पहले से है जबकि आयात में सिर्फ 7 प्रतिशत जिससे आगे और बढ़ने के आसार हैं और ऐसा होने पर रुपये में मजबूती आएगी. महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी. बताया जा रहा है कि यह समझौता भारत को वैश्विक व्यापार में मजबूत खिलाड़ी बनाने का रास्ता साफ करेगा खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था चुनौतियों से जूझ रही हैं.

ग्लोबल बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी

विशेषज्ञों का मानना है कि आयात में बढ़ोतरी से कुछ क्षेत्रों जैसे ऊर्जा और धातु में निर्भरता बढ़ सकती है लेकिन कुल मिलाकर यह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा अवसर साबित होगा. बता दें वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी हाल ही में निर्यातकों से कहा था कि वे इन अवसरों का फायदा उठाएं और वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाएं.

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