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PPF Vs NPS: करोड़पति बनने के सपने को साकार करने में कौन है मददगार, जानिए यहां

PPF Vs NPS: अगर कोई व्यक्ति NPS में 100 रुपये और पीपीएफ में 100 रुपये निवेश करता है तो उस व्यक्ति को पीपीएफ के ऊपर 7.1 फीसदी का रिटर्न मिलता है. वहीं एनपीएस के ऊपर 10 फीसदी तक रिटर्न मिल सकता है, जो कि पीपीएफ के मुकाबले ज्यादा है.

Written By : बिजनेस डेस्क | Edited By : Dhirendra Kumar | Updated on: 09 Mar 2021, 12:16:36 PM
How To Become A Crorepati: PPF Vs NPS

How To Become A Crorepati: PPF Vs NPS (Photo Credit: newsnation)

highlights

  • शेयर बाजार से जुड़ा होने की वजह से एनपीएस में निवेश से ज्यादा रिटर्न की संभावना 
  • एनपीएस के जरिए रिटायरमेंट के समय भरपूर पैसा और मासिक पेंशन की व्यवस्था हो जाएगी

नई दिल्ली:

PPF Vs NPS: पब्लिक प्रॉविडेंट फंड और नेशनल पेंशन सिस्‍टम निवेश के दो महत्वपूर्ण साधन है. हालांकि दोनों ही प्रोडक्ट में कुछ अंतर भी हैं ऐसे में जब भी पीपीएफ (PPF) और एनपीएस (NPS) में से किसी एक का चुनाव करना होता है तो निवेशक असमंजस में पड़ जाते हैं. एनपीएस अकाउंट में शेयर की हिस्सेदारी अधिक होती है. शेयर बाजार (Share Market Latest News) से जुड़ा होने की वजह से एनपीएस में निवेश से ज्यादा रिटर्न (How To Become A Crorepati) की संभावना रहती है. अगर कोई व्यक्ति NPS में 100 रुपये और पीपीएफ में 100 रुपये निवेश करता है तो उस व्यक्ति को पीपीएफ के ऊपर 7.1 फीसदी का रिटर्न मिलता है. वहीं एनपीएस के ऊपर 10 फीसदी तक रिटर्न मिल सकता है, जो कि पीपीएफ (Public Provident Fund) के मुकाबले ज्यादा है.  

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PPF की गणना
अगर कोई व्यक्ति एक साल में पब्लिक प्रॉविडेंट फंड में 1.5 लाख रुपये या 12,500 रुपये हर महीने जमा करता है और निवेश की अवधि के दौरान निवेशक को 7.1 फीसदी का ब्याज मिलता है तो पीपीएफ कैल्कुलेटर के मुताबिक 30 साल के बाद निवेशक को मैच्योरिटी अमाउंट 1,54,50,911 रुपये मिलेगा.

NPS की गणना
वहीं अगर कोई व्यक्ति NPS की स्कीम में 1.5 लाख रुपये सालाना या फिर 12,500 रुपये महीने जमा करता है और एन्युटी को 40 फीसदी रखा जाता है. एनपीएस कैल्कुलेटर के मुताबिक परिपक्वता अवधि पर व्यक्ति 1,70,94,940 रुपये अपने खाते से निकाल सकता है. साथ ही शेष 1,13,96,627 रुपये का उपयोग एन्‍युटी खरीदने में कर सकता है. उस रकम से व्यक्ति को हर महीने 56,983 रुपये की पेंशन मिलेगी.

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जानकारों का कहना है कि अगर सिर्फ इन दोनों प्रोडक्ट में से किसी एक का चुनाव करना हो तो पीपीएफ अकाउंट के बजाए एनपीएस स्‍कीम ज्यादा बेहतर है. दरअसल, एनपीएस के जरिए रिटायरमेंट के समय ना सिर्फ आपको भरपूर पैसा मिलेगा बल्कि मासिक पेंशन की भी व्यवस्था हो जाएगी. बता दें कि पब्लिक प्रॉविडेंट फंड में एक वित्त वर्ष में 50 रुपये के गुणक में कितनी बार भी रकम जमा कर सकता है, लेकिन जमा रकम 1.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए. पहले के नियम में एक वित्त वर्ष में 12 बार पैसे को जमा किया जा सकता था. PPF की परिपक्वता अवधि 15 साल है और केंद्र सरकार हर तीन महीने में इसके ऊपर मिलने वाले ब्याज दर की समीक्षा करती है. बता दें कि नेशनल पेंशन सिस्‍टम एक स्‍वैच्छिक पेंशन योगदान सिस्‍टम है. एनपीएस का प्रबंधन और नियमन पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) करती है.

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First Published : 09 Mar 2021, 12:16:36 PM

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