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7th Pay Commission: मोदी सरकार के इस फैसले से करोड़ों कर्मचारियों को मिलेगी ज्यादा सैलरी, जानिए कैसे

7th Pay Commission: श्रम मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि किसी भी सदस्य के पास वैधानिक दर (10 प्रतिशत) से अधिक दर पर योगदान करने का विकल्प होता है, पर कर्मचारी के संबंध में नियोक्ता अपने योगदान को 10 प्रतिशत तक सीमित कर सकता है.

Bhasha | Updated on: 20 May 2020, 07:22:46 AM
EPFO EMPLOYEE

7th Pay Commission: Employees (Photo Credit: फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

सातवां वेतन आयोग (7th Pay Commission): श्रम मंत्रालय (Union Labour Ministry) ने कहा है कि कर्मचारी अगले तीन महीने तक अपने मूल वेतन की नई सीमा 10 प्रतिशत से अधिक भविष्य निधि में योगदान (Provident Fund Contribution) कर सकते हैं. हालांकि नियोक्ताओं को कर्मचारियों के बराबर उच्च दर से योगदान देने की आवश्यकता नहीं है. मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ईपीएफ योजना, 1952 के तहत किसी भी सदस्य के पास वैधानिक दर (10 प्रतिशत) से अधिक दर पर योगदान करने का विकल्प होता है, पर कर्मचारी के संबंध में नियोक्ता अपने योगदान को 10 प्रतिशत (वैधानिक दर) तक सीमित कर सकता है.

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मई, जून और जुलाई के वेतन में नियोक्ताओं का सामाजिक सुरक्षा योजना में योगदान 10 प्रतिशत
बयान में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि जून, जुलाई और अगस्त में मिलने वाला क्रमश: मई, जून और जुलाई के वेतन में नियोक्ताओं का सामाजिक सुरक्षा योजना में योगदान 10 प्रतिशत होगा. मंत्रालय ने सोमवार को भविष्य निधि में योगदान के 10 प्रतिशत निम्न दर से योगदान को अधिसूचित कर दिया. इस फैसले से संगठित क्षेत्र के 4.3 करोड़ कर्मचारी घर अधिक वेतन ले जा सकेंगे और कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Epidemic) के चलते नकदी संकट से जूझ रहे नियोक्ताओं को भी कुछ राहत मिलेगी.

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पिछले हफ्ते वित्त मंत्री ने भविष्य निधि में नियोक्ताओं और कर्मचारियों के योगदान को 12 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया था
पिछले सप्ताह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तीन महीने के लिये भविष्य निधि में नियोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों के योगदान को 12 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने की घोषणा की थी. इसका मकसद नियोक्ताओं और कर्मचारियों के पास नकदी की मात्रा बढ़ाना है. योगदान की दर में की गई कटौती केंद्र और राज्य सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों अथवा केंद्र सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण वाले किसी भी अन्य प्रतिष्ठान पर लागू नहीं है. ये प्रतिष्ठान मूल वेतन और महंगाई भत्ते के 12 प्रतिशत का योगदान पूर्व की तरह करते रहेंगे. कम की गई दर पीएमजीकेवाई (प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना)लाभार्थियों के लिए भी लागू नहीं है, क्योंकि पूरा कर्मचारी ईपीएफ योगदान (वेतन का 12 प्रतिशत) और नियोक्ताओं का ईपीएफ और ईपीएस योगदान (वेतन का 12 प्रतिशत), मासिक वेतन का कुल 24 प्रतिशत का योगदान का वहन केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा है.

First Published : 20 May 2020, 07:22:46 AM

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