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पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम का दावा, सिर्फ 1.86 लाख करोड़ रुपये का है राहत पैकेज

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम (P Chidambaram) ने आरोप लगाया कि सरकार के आर्थिक पैकेज से 13 करोड़ कमजोर परिवार, किसान, मजदूर और बेरोजगार हो चुके लोग छूट गए हैं.

News Nation Bureau | Edited By : Dhirendra Kumar | Updated on: 18 May 2020, 03:28:39 PM
P Chidambaram

पी चिदंबरम (P Chidambaram) (Photo Credit: फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

केंद्र की नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार द्वारा जारी किए गए 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम (P Chidambaram) ने काफी निराशा व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि हम राहत पैकेज पर अपनी निराशा व्यक्त करते हैं और प्रोत्साहन पैकेज पर सरकार से पुनर्विचार करने के लिए अनुरोध करते हैं. पूर्व वित्त मंत्री ने यह दावा भी किया कि सरकार की ओर से घोषित पैकेज में सिर्फ 1,86,650 करोड़ रुपये की वित्तीय प्रोत्साहन राशि है जो भारत की जीडीपी का सिर्फ 0.91 फीसदी है.

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आर्थिक पैकेज की कई घोषणाएं बजट का हिस्सा: चिदंबरम
उन्होंने वीडियो लिंक के माध्यम से संवाददाताओं से कहा, कि हमने वित्त मंत्री की ओर से घोषित पैकेज का पूरे ध्यान से विश्लेषण किया. हमने अर्थशास्त्रियों से बात की. हमारा यह मानना है कि इसमें सिर्फ 1,86,650 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज है. चिदंबरम के मुताबिक आर्थिक पैकेज की कई घोषणाएं बजट का हिस्सा हैं और कई घोषणाएं कर्ज देने की व्यवस्था का हिस्सा है. उन्होंने सरकार की ओर से घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज में गरीबों, किसानों और श्रमिकों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाते हुए सोमवार को कहा कि सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए और 10 लाख करोड़ रुपये के व्यापक वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करनी चाहिए.

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पैकेज से 13 करोड़ कमजोर परिवार, किसान, मजदूर और बेरोजगार हो चुके लोग छूटे
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के आर्थिक पैकेज से 13 करोड़ कमजोर परिवार, किसान, मजदूर और बेरोजगार हो चुके लोग छूट गए हैं. पूर्व वित्त मंत्री ने सरकार से आग्रह किया कि सरकार आर्थिक पैकेज पर पुनर्विचार करे, समग्र वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करे जो जीडीपी का 10 फीसदी हो. यह 10 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज होना चाहिए.

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कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री के पांच दिनों के ‘धारावाहिक’ से देश के गरीबों, मजदूरों, किसानों और मध्य वर्ग के लोगों को सिर्फ निराशा हाथ लगी है. उन्होंने कहा कि यह जुमला पैकेज है. वित्त मंत्री ने जो पांच दिनों तक धारावाहिक दिखाया है उससे साबित होता है कि इस सरकार को गरीबों की कोई चिंता नहीं है. लोगों की दर्द की अनदेखी की गई है. सुप्रिया ने कहा कि प्रधानमंत्री ने संसद के पटल पर मनरेगा का मजाक मनाया था। आज वही मनरेगा ग्रामीण भारत में संजीवनी का काम कर रही है.

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First Published : 18 May 2020, 03:27:15 PM