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भारत की GDP को लेकर इस ब्रोकरेज हाउस ने जारी किया नया अनुमान

यूबीएस सिक्योरिटीज (UBS Securities) ने कहा कि संकट से निपटने को लेकर सरकार के हल्के कदम समेत अन्य कारकों को ध्यान में रखकर उसने जीडीपी में गिरावट के अनुमान को संशोधित किया है.

News Nation Bureau | Edited By : Dhirendra Kumar | Updated on: 17 Sep 2020, 10:54:28 AM
GDP

GDP (सकल घरेलू उत्पाद) (Photo Credit: फाइल फोटो)

मुंबई:

Coronavirus (Covid-19): ब्रोकरेज कंपनी यूबीएस सिक्योरिटीज (UBS Securities) ने वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की GDP (सकल घरेलू उत्पाद) में 8.6 प्रतिशत गिरावट आने का अनुमान लगाया है. हालांकि, इससे पहले उसने इसमें 5.8 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान जताया था. यूबीएस सिक्योरिटीज ने कहा कि संकट से निपटने को लेकर सरकार के हल्के कदम समेत अन्य कारकों को ध्यान में रखकर उसने जीडीपी में गिरावट के अनुमान को संशोधित किया है. उसने कहा कि आर्थिक वृद्धि में गिरावट को थामने के लिये ठोस कदम के अभाव में देश में वृद्धि की संभावना दर भी घटकर 5.75 से 6.25 प्रतिशत पर आ गयी है जबकि पूर्व में यह 7.1 प्रतिशत थी.

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जीडीपी में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में करीब एक चौथाई की गिरावट
ब्रोकरेज कंपनी की मुख्य अर्थशास्त्री तन्वी गुप्ता जैन ने संवाददाताओं से कहा कि उच्च आवृत्ति के आंकड़े में कुछ सुधार है लेकिन इसका प्रमुख कारण गिरावट के बाद मांग में सुधार होना है और सितंबर तिमाही के बाद आर्थिक पुनरूद्धार धीरे-धीरे होगा. उल्लेखनीय है कि देश के जीडीपी में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में करीब एक चौथाई की गिरावट आयी है. इसका एक बड़ा कारण कोविड-19 माहामारी और उसकी रोकथाम के लिये लॉकडाउन लगाया जाना था. इससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं. देश में सक्रमित मामलों में वृद्धि जारी है और भारत अब दुनिया में दूसरा सर्वाधिक संक्रमित देश हो गया है. जैन ने कहा कि जो पुनरूद्धार अभी हम देख रहे हैं, वह टिकने वाला नहीं है क्योंकि संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं और इसके साथ आय को लेकर अनिश्चितता भी बढ़ रही है. इससे लोग खपत को कम कर रहे हैं जबकि अर्थव्यवस्था लगभग 60 प्रतिशत तक इस पर निर्भर है.

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जीडीपी में 2020-21 में 8.6 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान
उन्होंने कहा कि इसको देखते हुए हमारा मानना है कि जीडीपी में 2020-21 में 8.6 प्रतिशत की गिरावट आएगी. वहीं 2021-22 में इसमें 10 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है. जैन ने महामारी के कारण हुए नुकसान, कंपनियों के बही-खातों की समस्या तथा संकट को लेकर हल्का रुख का हवाला देते हुए अर्थव्यवस्था में वृद्धि की संभावना दर को भी संशोधित किया. उन्होंने कहा कि जो राजकोषीय प्रोत्साहन दिये गये हैं, वह केवल 1.8 प्रतिशत है और दूसरे दौर के प्रोत्साहन की तत्काल जरूरत है. जैन ने कहा कि भारत को मजबूत आर्थिक सुधारों के साथ ठोस राजकोषीय प्रोत्साहन की जरूरत है. उन्होंने कहा कि सरकार को बुनियादी ढांचा विकास और निर्माण गतिविधियों पर खर्च करने की जरूरत है. साथ ही गांव एवं शहरों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करने के लिये पहल करने की आवश्यकता है.

First Published : 17 Sep 2020, 10:51:20 AM

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