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गन्ना किसानों को मोदी सरकार ने दी बड़ी सौगात, गन्ने के सरकारी भाव को बढ़ाने की दी मंजूरी

सूत्रों ने बताया कि मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक में यह निर्णय लिया गया है. बैठक में गन्ने का 2020- 21 (अक्टूबर- सितंबर) विपणन वर्ष के लिये एफआरपी दाम 10 रुपये क्विंटल बढ़ाने को मंजूरी दी गई.

News Nation Bureau | Edited By : Dhirendra Kumar | Updated on: 21 Aug 2020, 01:03:26 PM
sugarcane sugar

गन्ना (Sugarcane) (Photo Credit: फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

केंद्र की नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार ने बुधवार को गन्ने (Sugarcane) का उचित एवं लाभकारी (Fair & Remunerative Price-FRP) दाम 10 रुपये बढ़ाकर 285 रुपये क्विंटल करने को मंजूरी दे दी. यह दाम गन्ने के अक्टूबर 2020 से शुरू होने वाले नये विपणन सत्र के लिये तय किया गया है. आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी. सूत्रों ने बताया कि मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक में यह निर्णय लिया गया है. बैठक में गन्ने का 2020- 21 (अक्टूबर- सितंबर) विपणन वर्ष के लिये एफआरपी दाम 10 रुपये क्विंटल बढ़ाने को मंजूरी दी गई.

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खाद्य मंत्रालय ने गन्ने का एफआरपी 275 रुपये से बढ़ाकर 285 रुपये क्विंटल करने का दिया था प्रस्ताव
सूत्रों ने बताया कि सीसीईए ने खाद्य मंत्रालय के इस संबंध में दिये गये प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. मंत्रालय ने अगले विपणन सत्र के लिये गन्ने का एफआरपी 275 रुपये से बढ़ाकर 285 रुपये क्विंटल करने का प्रस्ताव दिया था. सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल समिति का यह निर्णय कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिश के मुताबिक है. सीएसीपी सरकार को प्रमुख कृषि उत्पादों के दाम को लेकर सलाह देने वाली सांविधिक संस्था है. एफआरपी को गन्ना (नियंत्रण) आदेश 1966 के तहत तय किया जाता है. यह गन्ने का न्यूनतम मूल्य होता है जिसे चीनी मिलों को गन्ना उत्पादक किसानों को भुगतान करना होता है.

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सरकार का अनुमान है कि चालू विपणन सत्र में गन्ने का कुल उत्पादन 280 से 290 लाख टन रह सकता है. गन्ने का चालू विपणन सत्र अगले महीने समाप्त हो रहा है. पिछले साल 2018- 19 में देश में 331 लाख टन गन्ने का उत्पादन हुआ था. महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की खेती में कमी आने से चालू विपणन सत्र में उत्पादन कम रहने का अनुमान है. बता दें कि चीनी उत्पादन वर्ष 2019-20 में चीनी मिलों के ऊपर गन्ना किसानों का 22 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया हो चुका है. गौरतलब है कि फेयर एंड रेम्युनरेटिव प्राइस (Fair & Remunerative Price-FRP) केंद्र सरकार द्वारा गन्ना खरीद के लिए तय किया जाता है. वहीं इसके अलावा राज्य सरकारें गन्ना खरीद के लिए जो अतिरिक्त भाव तय करती हैं उसे स्टेट एडवाइज्ड प्राइस (State Advised Price-SAP) कहते हैं. चीनी उत्पादन वर्ष की गणना 1 अक्टूबर से 30 सितंबर तक की जाती है. (इनपुट भाषा)

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First Published : 19 Aug 2020, 03:55:06 PM

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