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किसान MSP से 1,000 रुपये क्विंटल नीचे कपास बेचने को मजबूर

हरियाणा में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह ने कहा कि कपास ही नहीं, मक्का और धान भी मंडियों में एमएसपी से नीचे के भाव बिक रहा है.

IANS | Updated on: 05 Oct 2020, 07:16:49 AM
Cotton

Cotton Price Today (Photo Credit: IANS)

नई दिल्ली:

Cotton Price Today: उत्तर भारत की मंडियों में कपास (नरमा) की आवक लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन सरकारी खरीद एजेंसी अब तक मंडी नहीं पहुंची है, जिससे किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 1,000 रुपये प्रति क्विंटल कम भाव पर बेचने को मजबूर है. हरियाणा के मंडी डबवाली के किसान जसबीर सिंह भट्टी ने बताया कि भारतीय कपास निगम (सीसीआई) की खरीद शुरू होने की उम्मीद में भाव में तेजी आई थी, लेकिन खरीद शुरू नहीं होने से फिर कपास (Kapas) में नरमी आ गई है.

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मजबूरी में कपास बेच रहे हैं किसान
भट्टी ने बताया कि डबवाली और सिरसा में कपास का भाव 4,700-4,800 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है, जबकि केंद्र सरकार ने चालू सीजन के लिए लंबा रेशा कपास का एमएसपी 5,825 रुपये प्रतिक्विंटल तय किया है. भट्टी ने किसानों को मजबूरी में एमएसपी से 1,000 रुपये प्रतिक्विंटल कम भाव कपास बेचना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें मजदूरों की मजदूरी से लेकर बैंकों का कर्ज चुकाना है और अगली फसल की बुवाई के लिए भी पैसों की जरूरत है.

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मंडियों में एमएसपी से नीचे बिक रहा है मक्का और धान
हरियाणा में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह ने कहा कि कपास ही नहीं, मक्का और धान भी मंडियों में एमएसपी से नीचे के भाव बिक रहा है. हालांकि पंजाब और हरियाणा में एमएसपी पर धान की खरीद 26 सितंबर को ही शुरू हो चुकी है और सरकार की ओर से रोज इसके आंकड़े जारी किए जा रहे हैं. केंद्र सरकार की घोषणा के अनुसार, चालू कपास सीजन 2020-21 (अक्टूबर-सितंबर) में कपास की खरीद की मंजूरी एक अक्टूबर से दी जा चुकी है। जबकि जरबीर सिंह कहते हैं कि नरमे की खरीद सिर्फ कागजों में शुरू हुई है, जबकि खरीद एजेंसी अभी मंडी नहीं पहुंची है.

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हालांकि सूत्र बताते हैं कि कपास की जो अभी फसल मंडियों में आ रही है, उसमें नमी ज्यादा है जबकि सीसीआई आठ से 12 फीसदी तक ही नमी वाले कपास की खरीद करता है. बाजार सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर भारत की मंडियों में बीते सप्ताह कपास का भाव 4,900-5,150 रुपये प्रतिक्विंटल तक चला गया था। सूत्र बताते हैं कि पंजाब में सीसीआई कपास की खरीद सोमवार से शुरू कर सकती है. कॉटन बाजार के जानकार गिरीश काबरा ने बताया कि भारतीय कॉटन यानी रूई की इस समय वैश्विक बाजार में जबरदस्त मांग है और चालू सीजन में निर्यात मांग तेज रहने की उम्मीद है, जिससे कॉटन की कीमतों में मजबूती रहेगी. उन्होंने कहा कि कॉटन के दाम में मजबूती रहने से किसानों को आने वाले दिनों में उनकी फसल का अच्छा भाव मिल सकता है.

First Published : 05 Oct 2020, 07:16:49 AM

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