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सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला: 28 बैंकों को लगाया चूना, नीरव मोदी भी छूटा पीछे

News Nation Bureau | Edited By : Vijay Shankar | Updated on: 13 Feb 2022, 08:34:29 AM
Biggest banking scam

Biggest banking scam (Photo Credit: File Photo)

highlights

  • ABG Shipyard का पर्दाफाश, नीरव मोदी से भी है दोगुना फ्रॉड
  • ABG Shipyard पर एफआईआर, 28 बैंकों को 22,842 करोड़ का लगाया चूना
  • सीबीआई ने दर्ज किया मामला, एबीजी शिपयार्ड मरम्मत और निर्माण के कारोबार में है

नई दिल्ली:  

भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की शिपयार्ड फर्म में से एक एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 28 बैंकों से 22,842 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज किया है. कंपनी के निदेशकों ऋषि अग्रवाल, संथानम मुथुस्वामी और अश्विनी कुमार को भी मामले में आरोपी बनाया गया है. यह सबसे बड़े बैंक धोखाधड़ी (नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से जुड़े पंजाब नेशनल बैंक घोटाले से भी बड़ा) मामलों में से एक है, जिसकी सीबीआई जांच करेगी. एबीजी शिपयार्ड एबीजी समूह की कंपनी से जुड़ा है, जो जहाज की मरम्मत और निर्माण के कारोबार में है. इसके शिपयार्ड गुजरात में हैं. 

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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट से पता चला है कि अप्रैल 2012 से जुलाई 2017 तक आरोपियों ने एक-दूसरे के साथ मिलीभगत की और धन की हेराफेरी और आपराधिक उल्लंघन सहित अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया. ऋषि अग्रवाल भारतीय जहाज निर्माण उद्योग में प्रमुख खिलाड़ी रहे हैं. एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड (ABGSL), शिपयार्ड के पास सूरत शिपयार्ड में 18,000 डेड वेट टनेज (DWT) और दहेज शिपयार्ड में 1,20,000 डेड वेट टनेज (DWT) तक जहाज बनाने की क्षमता है.

ABGSL ने 16 वर्षों में 165 से अधिक जहाजों का निर्माण किया

ABGSL ने भारत और विदेशों में अग्रणी कंपनियों के लिए पिछले 16 वर्षों में 165 से अधिक जहाजों (निर्यात बाजार के लिए 46 सहित) का निर्माण किया है, जिसमें न्यूजप्रिंट कैरियर्स, सेल्फ-डिस्चार्जिंग और लोडिंग बल्क सीमेंट कैरियर, फ्लोटिंग क्रेन, इंटरसेप्टर बोट, डायनेमिक पोजिशनिंग डाइविंग सपोर्ट वेसल, पुशर टग और फ्लोटिला जैसे विशेष जहाज शामिल हैं. एबीजीएसएल ने भी कथित तौर पर 2011 में भारतीय नौसेना से निर्मित जहाजों के अनुबंध प्राप्त किए थे, हालांकि, अनुबंध को बाद में समाप्त कर दिया गया था क्योंकि कंपनी आर्थिक रूप से संघर्ष कर रही थी.

वैश्विक संकट की वजह से शिपिंग उद्योग हुआ था प्रभावित

प्राथमिकी में यह भी उल्लेख किया गया है, वस्तुओं की मांग और कीमतों में गिरावट और बाद में कार्गो मांग में गिरावट के कारण वैश्विक संकट ने शिपिंग उद्योग को प्रभावित किया है. कुछ जहाजों के अनुबंधों को रद्द करने के परिणामस्वरूप इन्वेंट्री का ढेर लग गया. इसके परिणामस्वरूप कार्यशील पूंजी की कमी हुई है और परिचालन चक्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे लिक्विडिटी और वित्तीय समस्या बढ़ गई है. वाणिज्यिक जहाजों की कोई मांग नहीं थी क्योंकि उद्योग 2015 में भी मंदी के दौर से गुजर रहा था. इसके अलावा, 2015 में कोई नया रक्षा आदेश जारी नहीं किया गया था. कंपनी को सीडीआर में फिर से पटरी पर लाना बहुत मुश्किल लग रहा था. इस प्रकार, कंपनी नियत तारीख पर ब्याज और किश्तों का भुगतान करने में असमर्थ थी. कंपनी को अहमदाबाद पीठ के एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) के पास भेजा गया है, जिसने एबीजी शिपयार्ड के आधिकारिक परिसमापक को संपत्ति की निजी बिक्री करने की अनुमति दी थी.

सीबीआई कंपनी के निदेशकों को बुला सकती है पूछताछ के लिए

एबीजी शिपयार्ड पर एसबीआई का 2,925 करोड़ रुपये, आईसीआईसीआई बैंक का 7,089 करोड़ रुपये, आईडीबीआई बैंक का 3,634 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ बड़ौदा का 1,614 करोड़ रुपये, पीएनबी का 1,244 करोड़ रुपये और इंडियन ओवरसीज बैंक का 1,228 करोड़ रुपये बकाया है. कई बैंक ने आंतरिक जांच शुरू की, जिसमें पाया गया कि कंपनी अलग-अलग संस्थाओं को धन भेजकर बैंकों के संघ को धोखा दे रही थी. सूत्रों ने बताया कि सीबीआई आरोपी से जुड़े परिसरों की तलाशी भी ले रही है. सीबीआई आने वाले दिनों में एबीजी शिपयार्ड के निदेशकों को जांच में शामिल होने के लिए बुला सकती है और उनके बयान दर्ज करेगी. 
एबीजी ग्रुप के निदेशकों की गिरफ्तारी की भी संभावना है.

First Published : 13 Feb 2022, 08:33:29 AM

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