उत्तरकाशी आपदा: जानलेवा पहाड़ों के बीच राहत कार्य जारी, NDRF-सेना और डॉग स्क्वॉड ने संभाला मोर्चा, देखें ग्राउंड रिपोर्ट

उत्तरकाशी में आई भयंकर आपदा के बाद हालात बेहद खराब हैं. भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से रास्ते टूट गए हैं, सड़कें बंद हैं और चारों तरफ मलबा फैला है. ऐसे मुश्किल हालात में NDRF, सेना, ITBP और SDRF की टीमें राहत और बचाव कार्य में दिन-रात जुटी हैं.

उत्तरकाशी में आई भयंकर आपदा के बाद हालात बेहद खराब हैं. भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से रास्ते टूट गए हैं, सड़कें बंद हैं और चारों तरफ मलबा फैला है. ऐसे मुश्किल हालात में NDRF, सेना, ITBP और SDRF की टीमें राहत और बचाव कार्य में दिन-रात जुटी हैं.

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Dheeraj Sharma
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उत्तरकाशी जिले के धराली इलाके में हाल ही में आई आपदा ने सबको हिला कर रख दिया है. बादल फटने, भारी बारिश और लगातार भूस्खलन के कारण रास्ते टूट गए हैं, बिजली और संचार व्यवस्था ठप हो गई है. ऐसे मुश्किल हालातों में राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहा है.

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मातली हेलीपैड से न्यूज नेशन के संवाददाता रमेश भट्ट ने NDRF अधिकारी गंभीर सिंह चौहान से खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि उत्तरकाशी में पहले से NDRF की स्थायी टीम तैनात थी, लेकिन इस आपदा को देखते हुए देहरादून, रुद्रपुर और गचर से और टीमें मंगाई गई हैं. इन टीमों के पास सभी जरूरी उपकरण, दवाएं और प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड मौजूद हैं.

राहत के लिए हेलीकॉप्टर ऑपरेशन

शुरुआत में रास्ते पूरी तरह से बंद थे, इसलिए राहत कार्य नहीं हो पा रहा था. लेकिन जैसे ही हेलीकॉप्टर ऑपरेशन शुरू हुआ, NDRF की टीम ने 45 लोगों को सुरक्षित धराली तक पहुंचाया. सुबह से ही कई हैंडलर्स और उपकरण लेकर टीमें रवाना हो चुकी हैं.

अब तक 50 से ज्यादा NDRF के जवान मौके पर पहुंच चुके हैं, और 50 और जवान भेजने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए चिनूक हेलीकॉप्टर देहरादून से भेजा गया है, जो जवानों और राहत सामग्री को ले जाएगा.

डॉग स्क्वॉड की अहम भूमिका

गंभीर सिंह चौहान ने बताया कि NDRF की टीम में दो तरह के डॉग होते हैं- लाइव सेंट डॉग्स (जो जिंदा लोगों की गंध पहचानकर संकेत देते हैं) और कैडवर सर्च डॉग्स (जो मृत शरीर को ढूंढने में मदद करते हैं).

इन डॉग्स को 1.5 साल की लंबी ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें वो गहराई में दबे लोगों की पहचान करना सीखते हैं. आपको बता दें कि एक डॉग 10 मीटर तक दबे इंसान की गंध पहचान सकता है.

महाराष्ट्र से आए पर्यटक सुरक्षित

मिली जानकारी के मुताबिक, धराली में छुट्टियां बिताने आए महाराष्ट्र के 24 पर्यटक आपदा के बाद फंस गए थे. सेना और प्रशासन की मदद से सभी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है. पर्यटकों ने बताया कि गंगोत्री यात्रा के दौरान हादसे की जानकारी मिली, तो उन्हें तुरंत लौटा दिया गया. वहां मंदिर प्रशासन ने मुफ्त में भोजन और ठहरने की व्यवस्था की. आर्मी और पुलिस ने उन्हें वहां से हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकाल लिया.

उन्होंने कहा, “उत्तराखंड प्रशासन, आर्मी और लोकल लोगों ने हमारी बहुत मदद की. हम सब सुरक्षित हैं. घरवालों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं.”

चश्मदीदों की आंखों देखी – रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर

इस त्रासदी को अपनी आंखों से देखने वाले शिवांश नौटियाल और शुभ ने बताया कि हरदूदा का मेला चल रहा था और गांव में रौनक थी. तभी तेज बारिश और पहाड़ों से पत्थर गिरने की आवाजें आने लगीं. अचानक एक तेज बहाव आया जिसने सब कुछ तबाह कर दिया.

शिवांश ने कहा, “सिर्फ 25 सेकंड में मिट्टी और पत्थर ने सब कुछ अपने साथ बहा दिया. 30 से 40 लोगों की मौत हमारी आंखों के सामने हो गई.”

शुभ ने बताया, “ऐसा लग रहा था जैसे कोई फिल्म चल रही हो. बड़े-बड़े पत्थर लोगों पर गिर रहे थे और लोग पलक झपकते ही गायब हो रहे थे."

फिलहाल कैसी है स्थिति?

फिलहाल वहां बिजली और मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप हैं. सड़कें टूट चुकी हैं. लेकिन आर्मी और प्रशासन खाने-पीने की पूरी व्यवस्था कर रहे हैं. नेपाली मजदूरों और स्थानीय लोगों को भी खाना और राहत सामग्री दी जा रही है.

धराली में आई इस आपदा ने वहां के लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है. लेकिन राहत की बात यह है कि सरकार, सेना, NDRF और प्रशासन मिलकर दिन-रात काम कर रहे हैं. हर व्यक्ति को सुरक्षित निकालना और जरूरी सुविधाएं पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है.


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