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पाकिस्तान और अफगानिस्तान युद्ध Photograph: (AI)
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर अफगानिस्तान के खिलाफ "खुली जंग" का ऐलान कर दिया है. यह कदम तब उठाया गया जब पाकिस्तानी सेना ने काबुल, कंधार और पक्तिया जैसे इलाकों में हवाई हमले किए. पाकिस्तान का दावा है कि उसने इन हमलों में 130 से ज्यादा तालिबानी लड़ाकों को ढेर कर दिया है. यह पूरी कार्रवाई उस हमले के जवाब में की गई है जिसे पाकिस्तान ने सीमा पार से हुआ आतंकी हमला बताया था.
क्यों फूटा पाकिस्तान का गुस्सा?
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया एक्स पर बेहद कड़ा संदेश लिखा है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सब्र का बांध अब टूट गया है. उन्होंने तालिबान सरकार पर आरोप लगाया कि वे दुनिया भर के आतंकियों को पनाह दे रहे हैं और वहां से आतंकवाद को बाहर भेज रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि तालिबान ने अपने ही लोगों के हक छीने हैं और महिलाओं के उन अधिकारों को भी खत्म कर दिया है जो इस्लाम उन्हें देता है. पाकिस्तान का कहना है कि अब बातचीत का समय खत्म हो गया है और अब सीधी लड़ाई होगी.
अफगानिस्तान का क्या है कहना?
दूसरी तरफ, अफगानिस्तान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इन हवाई हमलों को "कायरतापूर्ण" हरकत बताया है. उनका कहना है कि इन हमलों में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है. वहीं, अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उन्होंने भी पलटवार किया है. अफगानिस्तान के मुताबिक, उनके सैनिकों ने सीमा पर कार्रवाई करते हुए 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है और पाकिस्तान की दो बेस और 19 चौकियों पर कब्जा कर लिया है.
क्या है 'डूरंड लाइन' का असली झगड़ा?
दोनों देशों के बीच इस खून-खराबे की सबसे बड़ी जड़ 'डूरंड लाइन' है. यह 2,611 किलोमीटर लंबी वह सीमा रेखा है जिसे 1893 में अंग्रेजों ने खींचा था. पाकिस्तान तो इसे अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, लेकिन अफगानिस्तान ने इसे कभी भी आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया. अफगानिस्तान का मानना है कि यह रेखा उनके पश्तून कबीलों को दो हिस्सों में बांटती है. इसी सीमा विवाद की वजह से दोनों देशों के बीच आजादी के समय से ही खींचतान चली आ रही है.
तनाव की एक बड़ी वजह
पाकिस्तान की नाराजगी का एक बड़ा कारण 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (TTP) नाम का संगठन है. पाकिस्तान का आरोप है कि TTP के लड़ाके अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल करके पाकिस्तान में हमले करते हैं. हालांकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इस बात से इनकार करती है, लेकिन पाकिस्तान का मानना है कि अफगानिस्तान इन आतंकियों को रोक नहीं रहा है. सीमा पर पाकिस्तान द्वारा लगाई जा रही बाड़ (फेंसिंग) को लेकर भी अक्सर दोनों सेनाओं के बीच झड़प होती रहती है.
पुराने समझौतों का क्या हुआ?
आपको बता दें कि अक्टूबर 2025 में भी दोनों देशों के बीच भारी गोलाबारी हुई थी. उस वक्त कतर और तुर्की जैसे देशों ने बीच-बचाव किया था और 48 घंटे के लिए लड़ाई रुकी थी. लेकिन वह समझौता बहुत ही कमजोर था क्योंकि उसमें भविष्य के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं निकाला गया था. अब फरवरी 2026 में हालात फिर से बेकाबू हो गए हैं और दोनों देश एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े हैं.
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