/newsnation/media/media_files/2026/02/09/who-is-shabana-mehmood-2026-02-09-19-15-13.jpg)
Who is Shabana Mahmood: ब्रिटिश राजनीति इन दिनों बड़े उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है. प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं और इसी बीच एक नाम तेजी से उभरकर सामने आ रहा है शबाना महमूद. चर्चाएं हैं कि अगर स्टार्मर की कुर्सी डगमगाती है, तो यूनाइटेड किंगडम को पहली मुस्लिम महिला प्रधानमंत्री मिल सकती है.
एपस्टीन विवाद से हिली सत्ता
दुनियाभर में एपस्टीन फाइल्स से जुड़े खुलासों ने कई सरकारों की नींव हिला दी है. ब्रिटेन भी इससे अछूता नहीं है. इस विवाद में कीर स्टार्मर के करीबी माने जाने वाले कुछ नामों पर सवाल उठ रहे हैं, जिससे लेबर सरकार की साख पर असर पड़ा है. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि अगर नेतृत्व परिवर्तन होता है, तो शबाना महमूद सबसे मजबूत दावेदार बन सकती हैं.
कौन हैं शबाना महमूद?
45 वर्षीय शबाना महमूद इस समय ब्रिटिश सरकार में होम मिनिस्टर हैं. पेशे से वकील शबाना को लेबर पार्टी की सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है. उनका जन्म इंग्लैंड के बर्मिंगम में हुआ, जबकि उनके माता-पिता का संबंध पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के मीरपुर क्षेत्र से रहा है.
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के लिंकन कॉलेज से कानून की पढ़ाई करने वाली शबाना 2010 में पहली बार सांसद चुनी गई थीं. वह उन गिनी-चुनी मुस्लिम महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने ब्रिटिश संसद में जगह बनाई.
लेबर पार्टी में बढ़ता प्रभाव
लेबर पार्टी में शबाना महमूद की पहचान एक प्रभावी वक्ता और रणनीतिक नेता के रूप में रही है. हाल के वर्षों में उन्होंने पार्टी से दूर हो चुके कई मतदाताओं को दोबारा जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है. खासतौर पर गाजा मुद्दे पर उनकी खुली राय ने पार्टी के भीतर और बाहर एक नया समर्थक वर्ग तैयार किया है.
फिलिस्तीन समर्थन और सख्त इमिग्रेशन नीति
शबाना महमूद की राजनीति का एक दिलचस्प पहलू यह है कि वह फिलिस्तीन की खुलकर समर्थक रही हैं, जबकि दूसरी ओर ब्रिटिश नागरिकता और सीमा सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त रुख रखती हैं. 2025 में होम मिनिस्टर बनने के बाद से उनका सबसे बड़ा एजेंडा ब्रिटेन की सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवासन पर नियंत्रण रहा है.
उत्तराधिकारी के तौर पर क्यों देखा जा रहा है नाम?
कीर स्टार्मर की छवि पर एपस्टीन विवाद की आंच और पार्टी के भीतर असंतोष ने नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को हवा दी है. स्टार्मर की करीबी होने के साथ-साथ शबाना महमूद की प्रशासनिक पकड़, राजनीतिक संतुलन और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर स्पष्ट राय उन्हें संभावित उत्तराधिकारी बनाती है.
बता दें कि फिलहाल ब्रिटेन की राजनीति अनिश्चितता के दौर में है. लेकिन इतना तय है कि अगर सत्ता परिवर्तन होता है, तो शबाना महमूद का नाम इतिहास रच सकता है. ब्रिटेन को पहली मुस्लिम महिला प्रधानमंत्री मिलना सिर्फ राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक संकेत भी होगा कि नेतृत्व अब पहचान से नहीं, क्षमता से तय हो रहा है.
यह भी पढ़ें - कौन है तान्या नाथन? जिन्होंने केरल की पहली नेत्रहीन जज बनकर रचा इतिहास
/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
Follow Us