US Venezuela Conflict: वेनेजुएला के बाद अब ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ी चिंताएं, कहीं यहां भी न हो जाए कब्जा

US Venezuela Conflict: डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी केटी मिलर द्वारा ग्रीनलैंड के नक्शे के साथ पोस्ट किए गए विवादास्पद बयान के बाद डेनमार्क और ग्रीनलैंड में चिंता बढ़ गई है.

US Venezuela Conflict: डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी केटी मिलर द्वारा ग्रीनलैंड के नक्शे के साथ पोस्ट किए गए विवादास्पद बयान के बाद डेनमार्क और ग्रीनलैंड में चिंता बढ़ गई है.

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Yashodhan Sharma
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US Venezuela Conflict: अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई के बाद, अब ग्रीनलैंड को लेकर नई चिंताएं उभरने लगी हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी केटी मिलर ने एक विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट किया, जिसमें ग्रीनलैंड का नक्शा और अमेरिकी झंडा दिखाया गया था. इस पोस्ट में 'SOON' शब्द का इस्तेमाल किया गया, जिससे यह संप्रेषित हुआ कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की तैयारी कर रहा है. इसके बाद डेनमार्क और ग्रीनलैंड में गहरी नाराजगी सामने आई है, क्योंकि ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है और उसकी संप्रभुता पर सवाल उठाए गए हैं.

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डेनमार्क ने जाहिर की चिंता

डेनमार्क ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर की और कहा कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा अमेरिकी सुरक्षा से जुड़ी हुई है, लेकिन किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई को नकारात्मक रूप से लिया जाएगा. डेनमार्क के राजदूत ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत सहयोग है, खासकर आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा के संदर्भ में. इसके अलावा, डेनमार्क ने 2025 तक अपने रक्षा बजट को बढ़ाकर 13.7 अरब डॉलर करने की योजना बनाई है ताकि आर्कटिक और नॉर्थ अटलांटिक क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत किया जा सके.

ग्रीनलैंड ने विशेष दूत नियुक्त

इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड के लिए एक विशेष दूत नियुक्त किया है, जिनका कहना है कि ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाना उनके लिए गर्व की बात होगी. ट्रंप ने पहले भी ग्रीनलैंड पर कब्जे की संभावना के बारे में बयान दिए थे, यह कहते हुए कि ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा था कि ग्रीनलैंड का कब्जा अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है.

नेताओं की क्या है प्रतिक्रिया

हालांकि, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने इन बयानों का विरोध किया है और कहा है कि किसी भी देश की संप्रभुता अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत तय होती है और जबरन कब्जा नहीं किया जा सकता. ग्रीनलैंड की अधिकांश आबादी डेनमार्क से स्वतंत्रता चाहती है, लेकिन वह अमेरिका का हिस्सा बनना नहीं चाहती.

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