ट्रंप के टैरिफ पर सस्पेंस बरकरार, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी बार टाला फैसला

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सरकार द्वारा लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ पर फैसला दूसरी बार टाल दिया है. इससे पहले 9 जनवरी को भी निर्णय स्थगित किया गया था. कोर्ट ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अगली सुनवाई या फैसला कब होगा.

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सरकार द्वारा लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ पर फैसला दूसरी बार टाल दिया है. इससे पहले 9 जनवरी को भी निर्णय स्थगित किया गया था. कोर्ट ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अगली सुनवाई या फैसला कब होगा.

author-image
Ravi Prashant
New Update
trump

प्रेसिडेंट ट्रंप Photograph: (X/whitehouse)

अमेरिका में रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर कानूनी अनिश्चितता और गहरी हो गई है. United States Supreme Court ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सरकार द्वारा लगाए गए व्यापक रेसिप्रोकल टैरिफ पर आज भी कोई फैसला नहीं सुनाया. यह दूसरी बार है जब कोर्ट ने इस मामले में निर्णय को टाल दिया है. इससे पहले 9 जनवरी को भी कोर्ट ने बिना कोई ठोस कारण बताए फैसला सुरक्षित रख लिया था.

Advertisment

तीन अन्य मामलों पर आए फैसले

आज सुप्रीम कोर्ट ने तीन अन्य मामलों में अपने फैसले जरूर सुनाए, लेकिन टैरिफ से जुड़े इस अहम केस पर न तो कोई मौखिक बहस हुई और न ही यह स्पष्ट किया गया कि अगली सुनवाई कब होगी या फैसला किस तारीख को आ सकता है. कोर्ट की इस चुप्पी के कारण यह मामला फिलहाल पूरी तरह अनिश्चितता में फंसा हुआ है, जिससे सरकार, कारोबारी वर्ग और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदार सभी असमंजस की स्थिति में हैं.

ट्रंप ने कैसे लगाया भारी-भरकम टैरिफ?

यह केस इस बुनियादी सवाल से जुड़ा है कि क्या राष्ट्रपति ने अपने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों से आगे बढ़कर लगभग सभी प्रमुख अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर 10 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक के टैरिफ एकतरफा रूप से लगाए. ट्रंप प्रशासन ने इन टैरिफ को लागू करने के लिए 1977 के International Emergency Economic Powers Act यानी IEEPA का सहारा लिया. सरकार का तर्क है कि बढ़ता व्यापार घाटा और फेंटेनाइल जैसे अवैध ड्रग्स की तस्करी अमेरिका के लिए “राष्ट्रीय आपातकाल” की स्थिति पैदा करती है, जिससे राष्ट्रपति को असाधारण शक्तियां मिलती हैं.

कारोबारियों और व्यापार संगठनों ने दी चुनौती

दूसरी ओर, डेमोक्रेट शासित 12 अमेरिकी राज्यों के कारोबारियों और व्यापार संगठनों ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि IEEPA कानून का उद्देश्य वास्तविक आपात स्थितियों से निपटना था, न कि दीर्घकालिक और व्यापक व्यापार नीति लागू करना. उनका तर्क है कि आयात शुल्क और टैरिफ तय करने का संवैधानिक अधिकार मुख्य रूप से अमेरिकी कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास.

फेडरल कोर्ट लगा चुका है झटका

इससे पहले निचली फेडरल अदालतें ट्रंप सरकार के कई टैरिफ को अवैध करार दे चुकी हैं. इन्हीं फैसलों के खिलाफ अपील के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. नवंबर 2025 में हुई मौखिक सुनवाई के दौरान यह संकेत मिले थे कि रूढ़िवादी और उदारवादी, दोनों ही तरह के जज राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों की इस व्याख्या को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं.

इस पर ट्रंप ने क्या कहा? 

आर्थिक दृष्टि से भी यह मामला बेहद अहम माना जा रहा है. अगर सुप्रीम कोर्ट टैरिफ के खिलाफ फैसला देता है, तो अमेरिकी सरकार को अनुमानित रूप से 130 से 150 अरब डॉलर तक की वसूली गई ड्यूटी लौटानी पड़ सकती है. खुद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी थी कि अगर सरकार यह केस हारती है, तो यह अमेरिका के लिए “आर्थिक आपदा” साबित हो सकती है. फिलहाल कोर्ट के निर्णय का इंतजार जारी है.

ये भी पढ़ें- अमेरिका में महंगाई के नरम आंकड़ों के बाद सोने और चांदी ने छुआ आसमान, बनाया नया रिकॉर्ड

Tarrif
Advertisment