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अमेरिका और ईरान तनाव Photograph: (NN)
संयुक्त राज्य अमेरिका ने गुरुवार को ईरान में जारी प्रदर्शनों के हिंसक दमन को लेकर वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारियों पर नए प्रतिबंध लगाए. अमेरिकी प्रशासन ने अली लारीजानी , जो ईरान कीसुप्रीम काउंसिल फॉर नेशनल सिक्योरिटी के सचिव हैं, को इस कार्रवाई का केंद्रीय चेहरा बताया.
US Treasury Secretary Scott Bessent ने कहा कि ये प्रतिबंध उन ईरानी नेताओं के खिलाफ हैं जिन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा का निर्देश दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम राष्ट्रपति Donald Trump के निर्देश पर उठाया गया और यह ईरानी जनता की स्वतंत्रता और न्याय की मांग के प्रति अमेरिकी समर्थन को दर्शाता है.
अली लारीजानी लगे गंभीर आरोप
US Department of the Treasury के Office of Foreign Assets Control के अनुसार, दिसंबर में देशभर में फैले प्रदर्शनों के दौरान Ali Larijani उन पहले वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल थे जिन्होंने बल प्रयोग की सार्वजनिक रूप से वकालत की. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व की ओर से सुरक्षा प्रतिक्रिया का समन्वय किया.
अमेरिका का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनों को दबाने के लिए जीवित गोलियों का इस्तेमाल किया और कई क्षेत्रों में हिंसक अभियान चलाए. यह कार्रवाई आर्थिक संकट और महंगाई के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शनों के बाद सामने आई, जो धीरे-धीरे सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गए.
कमांडरों भी लगे प्रतिबंध
इन प्रतिबंधों के तहत Islamic Revolutionary Guard Corps और आंतरिक कानून प्रवर्तन से जुड़े वरिष्ठ कमांडरों को भी निशाना बनाया गया है. इनमें लोरेस्टन प्रांत के वरिष्ठ पुलिस कमांडर Mohammad Reza Hashemifar और IRGC के प्रांतीय कमांडर Nematollah Bagheri शामिल हैं.
इसके अलावा Fars प्रांत में तैनात सुरक्षा अधिकारी Azizollah Maleki और Yadollah Buali पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं. अमेरिकी Treasury का कहना है कि इनके अधीन बलों ने प्रदर्शनकारियों की हत्या, धमकी और पीड़ित परिवारों को डराने जैसे कदम उठाए.
शैडो बैकिंग और आर्थिक पहलू
OFAC ने ईरान की तथाकथित शैडो बैकिंग नेटवर्क्स से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं को भी प्रतिबंधित किया है. अमेरिका के अनुसार, इन नेटवर्कों के जरिए पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल बिक्री से होने वाली आय को Bank Melli और Shahr Bank जैसी प्रतिबंधित संस्थाओं के माध्यम से धनशोधन किया गया.
यूएस अधिकारियों का आरोप है कि इन फंड्स का इस्तेमाल ईरान की गंभीर आर्थिक स्थिति सुधारने के बजाय आंतरिक दमन और विदेशों में गतिविधियों के लिए किया गया.
बढ़ता तनाव और कूटनीतिक प्रयास
मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि प्रदर्शनों के दमन में कम से कम 3,400 लोगों की मौत हुई है और हजारों को हिरासत में लिया गया, हालांकि तेहरान ने इन आरोपों को खारिज किया है. हिंसा के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने बंदियों को फांसी दी तो अमेरिका सैन्य प्रतिक्रिया दे सकता है. बाद में उन्होंने कहा कि ईरानी पक्ष से आश्वासन मिला है कि फांसी नहीं दी जाएगी. इस बीच सऊदी अरब, कतर और ओमान ने अंतिम समय में कूटनीतिक प्रयास कर वॉशिंगटन से संयम बरतने की अपील की, जिससे फिलहाल क्षेत्र में तनाव कुछ हद तक कम हुआ है.
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