US-Israel, Iran War: अमेरिकी सेना ने हमले के लिए कैसे किया AI का इस्तेमाल? 24 घंटों में तबाह कर दिए ईरान के 1000 ठिकाने

US-Israel, Iran War: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग का आज आठवां दिन है. अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमला करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया और 24 घंटों के भीतर 1000 से ज्यादा ठिकानों को तबाह कर दिया.

US-Israel, Iran War: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग का आज आठवां दिन है. अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमला करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया और 24 घंटों के भीतर 1000 से ज्यादा ठिकानों को तबाह कर दिया.

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Suhel Khan
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US Attacks Iran

अमेरिकी सेना ने AI का इस्तेमाल कर 24 घंटे में तबाह किए ईरान के 1000 ठिकाने Photograph: (AI Grok)

US-Israel, Iran War: अमेरिका और इजरायल ने आज से ठीक आठ दिन पहले यानी शनिवार (28 फरवरी, 2026) ईरान पर हमला किया था. दोनों देशों संयुक्त ऑरेशन में एक ही दिन में ईरान में तबाही मचा दी. इस हमले को लेकर लगातार नए-नए खुलासे हो रहे हैं. अब खबर आई है कि इस हमले के लिए अमेरिकी सेना ने एआई का इस्तेमाल किया. जिसने ईरान में भारी तबाही मचाई.

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शुरुआती 24 घंटे में 1000 ठिकानों को बनाया निशाना

खबरों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने उन्नत एआई-संचालित प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए शुरुआती 24 घंटों के भीतर ही करीब 1,000 ठिकानों को निशाना बनाया. वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एआई-सक्षम प्रणाली ने अमेरिकी सेना को अभियान के पहले 12 घंटों के भीतर ही ईरानी ठिकानों पर लगभग 900 मिसाइलें दागीं. इन शुरुआती हमलों के दौरान, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के परिसर को भी निशाना बनाया गया. इसमें उनकी मौत हो गई.

ऑपरेशन के लिए इस तकनीकी का किया इस्तेमाल

जानकारी के मुताबिक, ईरान में हमले के लिए अमेरिकी सेना ने जिस तकनीक का इस्तेमाल किया उसका नाम मेवन स्मार्ट सिस्टम है. जिसे अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनी पलान्टिर टेक्नोलॉजीज द्वारा विकसित किया गया है. जो एक अत्याधुनिक डेटा प्रोसेसिंग प्लेटफॉर्म है. ये सिस्टम उपग्रहों, निगरानी प्लेटफार्मों और अन्य सैन्य स्रोतों से एकत्रित भारी मात्रा में गोपनीय खुफिया डेटा का विश्लेषण करने में सक्षम है.

रिपोर्ट में इस टेक्नोलॉजी से परिचित व्यक्तियों का हवाला देते हुए कहा गया है कि ये सिस्टम रियल टाइम में खुफिया जानकारी उपलब्ध कराता है. साथ ही सैन्य कमांडरों को लक्ष्य निर्धारण संबंधी सुझाव भी देता है. इसके साथ ही ये ऑपरेशनल महत्व के आधार पर संभावित हमले के स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर बताया है.

इस तकनीकी में क्लाउड की अहम भूमिका

बताया जा रहा है कि मेवन प्लेटफॉर्म में क्लाउड नामक एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल यानी एआई भी शामिल है. जिसे एआई कंपनी एंथ्रोपिक द्वारा विकसित किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, क्लाउड खुफिया जानकारी का विश्लेषण करने, संभावित लक्ष्यों की पहचान करने और उनकी रणनीतिक महत्ता के आधार पर उन्हें क्रमबद्ध करने में सहायक है.

इस एआई का इस्तेमाल अभियानों के शुरू होने के बाद हमलों के प्रभाव का आकलन करने के लिए भी किया जाता है, जिससे कमांडरों को इसके रिजल्ट का तुरंत पता चल जाए और आगे की रणनीति बनाने में मदद मिले. इस एआई मॉडल का इस्तेमाल अमेरिकी सेना द्वारा एंथ्रोपिक और पैलेंटिर की साझेदारी के माध्यम से किया जाता है, जो इस तकनीक को अपने खुफिया प्लेटफॉर्म में संघटित करती है.

अमेरिकी सेना सबसे ज्यादा करती है इस तकनीकी का इस्तेमाल

बता दें कि मेवन स्मार्ट सिस्टम अमेरिकी सशस्त्र बलों के लिए पहले ही एक महत्वपूर्ण उपकरण बन चुका है. रिपोर्ट में कहा गया है कि  बताया गया है कि मई 2025 तक, 20,000 से अधिक अमेरिकी सैन्यकर्मी उपग्रहों और निगरानी प्रणालियों से प्राप्त खुफिया जानकारी को रियल टाइम में बदलने के लिए इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे थे. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य कमांडर संवेदनशील डेटा की विशाल मात्रा का तेजी निरीक्षण करने की क्षमता के कारण इस प्रणाली पर अत्यधिक निर्भर हो गए हैं.

युद्ध के मैदान में बढ़ती AI की निर्भरता

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस एआई प्लेटफॉर्म पर निर्भरता इतनी बढ़ गई है कि अगर एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई सेना को इस तकनीक का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश देते हैं, तो ट्रंप प्रशासन वैकल्पिक प्लेटफॉर्म विकसित होने तक सिस्टम तक पहुंच बनाए रखने के लिए सरकारी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है. जिससे ये पता चलता है कि एआई किस तरह से आधुनिक युद्ध को तेजी से आकार दे रही है, जिससे सैन्य बलों को खुफिया जानकारी का तेजी से विश्लेषण करने और अभूतपूर्व गति से अभियान चलाने में भी मदद मिल रही है.

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